हंसराज को शिक्षा ऋषि से मिली थी सादगी की सीख
मुजफ्फरनगर। पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री डॉ. हंसराज भारद्वाज को वीतराग स्वामी कल्याणदेव की ‘गुरुभक्ति’ में सादगी की सीख ही नहीं मिली थी, बल्कि 22 साल पहले उन्होंने अपनी पुत्री अनुराधा की याद में शुकतीर्थ में धर्मार्थ चिकित्सालय प्रारंभ करा कर जनसेवा के यज्ञ में आहुति भी दी। कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के नेता रहे भारद्वाज की जिले से अनेक स्मृतियां जुड़ी हैं।
यूपीए सरकार में वर्ष 2004 से 2009 तक देश के कानून मंत्री का दायित्व निभा चुके डॉ. एच.आर. भारद्वाज के निधन से पौराणिक शुकतीर्थ शोकाकुल है। वीतराग स्वामी कल्याणदेव से मुलाकात से उनके जीवन में सादगी, सेवा, त्याग की भावना जाग्रत हो गई थी। 13 नवंबर, 2006 को शहर के गांधी पालीटेक्निक में उन्होंने शिक्षा ऋषि की प्रतिमा का अनावरण किया था। डॉ. भारद्वाज ने कहा था कि लोक कल्याण की जैसी भावना महात्मा गांधी में थी, वैसी वीतराग संत के जीवन में दिखाई दी। कल्याण कारी इंटर कालेज बघरा के पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि डॉ. भारद्वाज शिक्षा ऋषि की सरलता एवं सादगी के कायल थे। शुकदेव आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश कहते हैं कि डॉ. भारद्वाज ने वर्ष 1998 में संतों, वृद्धजनों, असहायों की नि:शुल्क सेवा को शुकतीर्थ में अनुराधा धर्मार्थ चिकित्सालय प्रारंभ कराया था, जो उनके विशेष सहयोग से संचालित हो रहा है। समाजसेवी देवराज पंवार बताते है कि कर्नाटक के राज्यपाल पद का दायित्व निभाने के साथ वे शुकतीर्थ नहीं भूले। दिल्ली आवास पर आमंत्रित कर स्वामी ओमानंद को अनुराधा धर्मार्थ चिकित्सालय हेतु एक नई एंबुलेंस भेंट की थी।
भक्ति भाव से शुकतीर्थ आते थे डॉ. भारद्वाज
मोरना। शुकतीर्थ में जब भी पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज आए, भक्ति भाव से संतों का दर्शन करते थे। राजनीति की बातों से उनका गुरेज रहता था। 14 जुलाई, 2007 को वीतराग स्वामी कल्याणदेव की तृतीय पुण्यतिथि पर पत्नी प्रफुला भारद्वाज संग पधारे। भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद कहते हैं कि शुकतीर्थ के विकास में उनकी सेवाओं के ऋणी रहेंगे।