सरकार 82 मुकदमे वापसी की दे चुकी अनुमति
मुजफ्फरनगर। सूबे की योगी सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के चिह्नित किए गए 92 मुकदमों में से अभी तक 82 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दे चुकी है। अभियोजन की ओर से कोर्ट में 12 मुकदमों को वापस लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत प्रार्थनापत्र दिया जा चुका है। अदालत ने गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सरधना विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह और साध्वी प्राची आदि के खिलाफ दर्ज दंगे के मुकदमे को वापस लेने की अनुमति दी है।
साढ़े सात साल पहले वर्ष 2013 में जिले में हुए दंगे में पांच सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। एसआईसी ने जांच के उपरांत 170 मुकदमों में चार्टशीट दाखिल की थी। इनमें से अधिकांश मुकदमे आगजनी, लूट, डकैती आदि धाराओं के हैं। भाजपा नेताओं ने ऐसे मुकदमों को वापस लेने की पहल की थी। तीन साल पहले फरवरी 2018 को केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद डॉ. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक, राज्यमंत्री विजय कश्यप के अलावा भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, गठवाला खाप के राजेंद्र सिंह मलिक आदि ने सीएम योगी से भेंट की थी। बताया था कि दंगे के बाद पुलिस और कुछ लोगों ने पांच सौ से अधिक ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। उन्होंने सीएम को 131 मुकदमों की पत्रावली सौंपी थी। शासन ने जिला प्रशासन से इन मुकदमों की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी थी। तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने इन मुकदमों की आख्या शासन को भेजी थी। शासन ने इनमें से 92 मुकदमों को वापस लेने के लिए चिह्नित किया था, तभी से मुकदमे वापस लेने की कार्यवाही चल रही है। शासन की ओर से भी तक 82 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दी जा चुकी है। 92 मुकदमों से पांच मुकदमे कोर्ट में निस्तारित हो चुके हैं, जबकि एक में पुलिस एफआर लगा चुकी है। डीजीसी राजीव शर्मा ने बताया कि शासन से 82 मुकदमे वापस लेने की अनुमति मिल चुकी है। इनमें अभियोजन की ओर से 12 मुकदमों में 321 के तहत प्रार्थना पत्र संबंधित कोर्ट में दिया गया है।
हम अपने मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे: डॉ बालियान
मुजफ्फरनगर। सात सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ की महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीत सोम आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसे कोर्ट ने वापस लेने की अनुमति दे दी है। 31 अगस्त 2013 को भी नंगला मंदौड़ में पंचायत हुई थी, जिसमें भड़काऊ भाषण देने के आरोप में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने चार सितंबर को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मुकदमा एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रहा है। डॉ. संजीव बालियान ने मुकदमे वापसी के सवाल पर बताया कि हम अपने मुकदमे को वापस लेने की पैरवी नहीं करेंगे। पहले आम जनता पर हुए फर्जी मुकदमे वापस कराए जाएंगे। विधायक उमेश मलिक का भी कहना है कि हम बीते तीन साल से आम लोगों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस कराने की पैरवी कर रहे हैं।
राणा और सोम ने खुद की पैरवी
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक आदि द्वारा सीएम योगी से मुलाकात करके मुकदमों की जो लिस्ट उन्हें सौंपी थी। उसमें मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीन सोम का मुकदमा शामिल नहीं था। सुरेश राणा और संगीत सोम ने इस मुकदमे को वापस लिए जाने की पैरवी खुद की थी। करीब डेढ़ साल पहले शासन ने इस मुकदमे को वापस की अनुमति दी थी।
केवल कवाल कांड में ही हुई सजा
मुजफ्फरनगर। साढ़े सात साल से दंगे के मुकदमे विभिन्न अदालतों में चल रहे है। अभी तक केवल कवाल कांड में आरोपियों को सजा हुई है। अदालत ने आठ फरवरी 2019 को कवाल के सचिन-गौरव हत्याकांड में सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।