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12 साल बाद जनाक्रोश का गवाह बना जीआईसी मैदान

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राजकीय कालेज के मैदान में खडे़ टैक्टर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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12 साल बाद जनाक्रोश का गवाह बना जीआईसी मैदान
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मुजफ्फरनगर। रालोद के आह्वान पर लोकतंत्र बचाओ रैली के लिए जिस मैदान को चुना गया, उस मैदान का राजनीतिक उलटफेर का पुराना इतिहास रहा है। वर्ष 2008 में तत्कालीन विधायक पंकज मलिक पर दर्ज मुकदमों के विरोध में बसपा सरकार के खिलाफ यहां जनाक्रोश दिखाई दिया था। 12 साल बाद हाथरस की घटना के बाद एक बार फिर तमाम राजनीतिक दल एक साथ मंच पर दिखाई दिए।
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यह मैदान जनपद के साथ ही देश और प्रदेश की कुछ प्रमुख राजनीतिक यादों का गवाह बनता रहा है। जयंत चौधरी के समर्थन में जिस प्रकार से विपक्ष एकजुट होकर एक मंच पर आया, वह भले ही प्रदेश में राजनीति का कुछ नयापन लग रहा हो, लेकिन इस मैदान पर ऐसा ही घटनाक्रम 12 साल पहले घटित हो चुका है। वर्ष 2008 में जिला पंचायत सभागार में हुई बैठक में कांग्रेस विधायक पंकज मलिक की और डीडीओ के बीच कहासुनी हो गई। अपशब्द कहे जाने पर विधायक समर्थकों ने डीडीओ की पिटाई कर दी, जिस पर पुलिस ने विधायक व समर्थकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए। इसे जाट समाज का अपमान बताते हुए बालियान खाप और भाकियू मुखिया चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने बसपा सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान कर कांग्रेस को समर्थन किया। इसके बाद हुई पंचायत में चौधरी अजित सिंह भी शामिल हुए थे। बाद में महेंद्र सिंह टिकैत और अजित सिंह की मौजूदगी में आधी रात में डीएम द्वारा माफी मांगे जाने पर यह आंदोलन समाप्त हुआ था।
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