गंगा का सर्वे करने पहुंची टीम।
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पौराणिक तीर्थनगरी शुक्रताल में गंगा जल बढ़ाए जाने की मांग को लेकर केंद्रीय जल आयोग व ड्रेनेज खंड मेरठ की टीमों ने गंगा खादर, बिजनौर गंगा बैराज, अपर गंगा कैनाल धनोरी, बालावाली, तौफीर सोनाली नदी पुल आदि सहित दर्जनों स्थानों का सर्वे किया। सर्वे के दौरान दो प्वाइंटों से गंगा में जल बढ़ाए जाने की संभावनाओं की जगहों को चिह्नित किया। टीम को तीन दिनों तक सर्वे कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
पश्चिम उत्तर प्रदेश के पौराणिक महाभारत कालीन धर्मनगरी व भागवत उद्गम स्थली के रूप में विख्यात शुक्रताल में देश के हर जगह से प्रतिवर्ष लाखों लोग पुण्य अर्जित करने को पधारते हैं। जिसमें भागवत कथा के श्रवण के दौरान गंगा में डुबकी लगाकर धर्म लाभ कमाते हैं। उत्तराखंड से शुक्रताल में आने वाले गंगा जल में भारी कमी आ गई थी। जिसको दूर करने व गंगा जल को बढ़ाने के लिए साधु और संतों सहित श्रद्धालुओं की मांग पर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने गंगा में जल बढ़ाए जाने का आश्वासन देकर केंद्रीय जल आयोग की टीम को इसकी जिम्मेदारी दी थी।
जिसके चलते केंद्रीय जल आयोग लखनऊ के डायरेक्टर शिव प्रसाद, सुधीर सिंह देहरादून, एसएल मीना आगरा व आशीष पांडे आदि के नेतृत्व में टीम ने शुक्रताल गंगा घाट, शुक्रताल बंधे पर आकर मिलने वाले सोनाली नदी व राम गंगा बाण स्रोत, तोफीर सोनाली नदी पुल, बालावाली गंगा पुल, पश्चिम वाह्य नाला लक्सर रुड़की आदि सहित दर्जनों स्थानों का सर्वे किया।
सर्वे के दौरान दो प्वाइंटों के अंतर्गत अपर गंगा कैनाल से धनोरी से रतमउ नदी में, पश्चिम बहाना बाण गंगा से बालावाली गंगा से 500 क्यूसेक जल को छोड़कर शुक्रताल में गंगा घाट पर जल की धारा को बढ़ाने के प्रोजेक्ट पर तीन दिनों तक गहनता से साथ टीम सर्वे पर काम करेगी। जिसमें करीब 25 किलोमीटर तक गंगा जल के बहाव को बढ़ाने पर गंगा खादर के क्षेत्र में काम होगा। इस दौरान ड्रैनेज खंड मेरठ के सहायक अभियंता अशोक, नानक चंद, दुष्यंत, सुनील गौतम, शिव भारद्वाज, जयप्रकाश आदि मौजूद रहे।