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दोस्ती के अनमोल रिश्ते को दशकों से निभा रही जोड़ियां

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नई मंडी निवासी रेणू एवं बबीता मित्तल - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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दोस्ती के अनमोल रिश्ते को दशकों से निभा रही जोड़ियां
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मुजफ्फरनगर/चरथावल। दोस्ती अनमोल होती है। इस रिश्ते को उम्र और बंधन में नहीं बांधा जा सकता। शहर हो या देहात, दोस्ती के अनमोल बंधन को लोग कई दशकों से जिंदा रखे हैं। वक्त की बयार में विदेशों और दूरस्थ शहरों में रहने वालों के लिए स्मार्ट फोन पर साइटें फ्रैंडशिप के अटूट रिश्तों में सेतु की भूमिका निभा रही हैं। रविवार को मनाए जाने वाले फ्रेंडशिप डे पर दशकों से चले आ रहे प्रगाढ़ रिश्तों के बारे में दोस्तों से संवाद किया। इस पर लोगों ने कहा कि दोस्ती हर मर्ज की दवा है। बातचीत के प्रमुख अंश-
मुजफ्फरनगर नई मंडी निवासी विनयकांत की जीवन संगिनी रेणु और कानपुर की बबीता मित्तल बचपन की दोस्त हैं। शादी के बाद दोनों सिल्वर जुबली सेलिब्रट कर चुकी हैं। दोनों के बीच दोस्ती का पावन रिश्ता ज्यों का त्यों है। रेणु बताती हैं कि विश्वास में दोस्ती कभी आंच नहीं आ सकती। करीब 40 साल पहले बुढ़ाना में पढ़ाई करने के दरमियान बने संबंध आज भी बेजोड़ हैं। वीडियो कॉल पर बबीता से बात होती रहती है। दोनों का मानना है दोस्त एक बार बनते हैं फिर जिंदगी दोस्तों के साथ चलती है।
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शहर के आदर्श कॉलोनी कांति अपार्टमेंट के बाशिंदे पंकज त्यागी और अभिषेक त्यागी के बीच दोस्ती के करीब तीन दशकों के खट्टे मीठे अनुभवों की कोई सानी नहीं है। दोनों ने इंटर तक जय हिंद इंटर कॉलेज चरथावल में कक्षा 12 वीं तक शिक्षा ग्रहण की। दूरस्थ प्रांतों में टॉवर लगाने के काम में साथ रहे। बाद में अभिषेक देहरादून बिल्डिंग मैटिरियल सप्लाई के काम में जुड़ा है। पंकज पब्लिक स्कूल चला रहे हैं। परिवार के सुख-दुख में दोनों का परस्पर सहयोग रहता है। सोशल साइटों पर खूबसूरत अंदाज में दोस्ती का पैगाम भेजने का सिलसिला चलता रहता है।
बाजार कलां निवासी भट्ठा कारोबारी सतीश गर्ग और अश्विनी गोयल की दोस्ती मिसाल बन गई है। बचपन में अग्रवाल धर्मशाला में प्राइमरी कक्षा से दोनों एक दिन स्कूल गए। दोनों की एक ही जन्मतिथि 10 जुलाई 1958 है। दिलचस्प है कि दोनों का भट्ठे का कारोबार है। मॉर्निग वॉक हो या कहीं बाहर जाना अक्सर एक साथ नजर आते हैं। अटूट रिश्तों के बारे में हर कोई उनकी दोस्ती के मायने बताते हैं।
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चरथावल के महाब्रह्मणान निवासी केमिस्ट सुशील कश्यप और डा. शैलेंद्र त्यागी के बीच दोस्ती स्कूल टाइम से है। शादी के 20 साल बाद भी व्यापार हो या फिर कोई समारोह। दोनों एक साथ शामिल होते हैं। नया काम पारस्परिक सलाह और हित को देखकर करते हैं। दोनों एक दूसरे की हर जरूरतों में हाथ बटाते है। सुशील कहते हैं कि दोस्ती का रिश्ता अनमोल होता है। इसे उम्र और जाति धर्म के बंधन में बांधना नाइंसाफी होगी। दोनों के लिए...जब जब राह ना पाएं, पग पग दीप जलाएं, मेरी दोस्ती मेरा प्यार...गाने की लाइनें सटीक बैठती है।
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