शहर में दस लोगों ने मिलकर बीमा कंपनी को चालीस लाख रुपयों का चूना लगा दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर एसआइटी के निरीक्षक की शिकायत पर शहर कोतवाली में फर्जी तरीके से बीमा कंपनी से क्लेम लेने के आरोप में दस लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
एक प्राइवेट बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर बताया था कि कुछ लोग फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर बीमा कंपनी से लाखों रुपयों का बीमा ले लेते हैं। मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अपर पुलिस महानिदेशक विशेष जांच को मामले में जांच के आदेश दिए।
एसआइटी द्वारा की जा रही जांच में एक मामला शहर का भी सामने आया। एसआइटी विशेष जांच लखनऊ के निरीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे ने रविवार को शहर कोतवाली पहुंचकर फर्जी क्लेम लेने के मामले में एक मुकदमा दर्ज कराया। निरीक्षक के अनुसार 19 अप्रैल 2014 को वाहन स्वामी बबलू के वाहन संख्या यूपी-14जे-9486 में सचिन, रजनीश और ओमप्रकाश बैठकर कहीं जा रहे थे। कोतवाली क्षेत्र में पीनना के पास उक्त वाहन को आरोपियों ने पलटा हुआ बताकर खुद का घायल दिखाया।
जिसमें सचिन और रजनीश के पैर कटने और ओमप्रकाश का हाथ कटना दिखाया गया था। तीनों ने आइसीआइसी लोम्बार्ड बीमा कंपनी सेे चालीस लाख रुपये क्लेम लेकर फर्जीवाड़ा किया था। जांच में सभी तरह के प्रमाणपत्र, मेडिकल, दवाइयों के पर्चे आदि सभी कुछ फर्जी पाया गया है।
निरीक्षक की तहरीर पर वाहन स्वामी बबलू निवासी परीक्षितगढ, सचिन निवासी मीरापुर, रजनीश निवासी बिजनौर, ओमप्रकाश, अधिवक्ता अरविंद, मनोज निवासीगण मेरठ और बीमा कंपनी का अधिवक्ता बलराम सिंह यादव, बीमा कंपनी के अधिकारी, हिमालयन नर्सिंग होम और तत्कालीन पीठासीन अधिकारी लेवर कोर्ट के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
जांच के दौरान पाया गया फर्जीवाड़ा
मुजफ्फरनगर। एसआइटी विशेष जांच लखनऊ के निरीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे ने बताया कि दुर्घटना में 19 अप्रैल 2014 को पीनना के पास गाड़ी पलटना दिखाया गया है, जबकि जांच के दौरान वहां ऐसी कोई दुर्घटना नहीं होनी पाई गई । रजनीश ने दुर्घटना में अपना पैर कटना दिखाया है जबकि उसका पैर 2011 में गैंगरीन के चलते उत्तराखंड के कनखल में कटा था। सचिन का पैर 11 मई- 2010 में हुए एक एक्सीडेंट में कटा था।
ओमप्रकाश का हाथ भी पहले ही कही कट चुका है। मामले से जुड़े सभी लोगों में घायल, गाड़ी स्वामी, वकील, बीमा कंपनी अधिकारी, लेबर कोर्ट अधिकारी सभी ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया है। बताया एसआइटी द्वारा की जांच में मेरठ मंडल में फर्जी क्लेम लेने के दर्जनों मामले सामने आए है। सभी पर जांच चल रही है। कुछ मामले अन्य शहरों में दर्ज भी करा दिए गए है।