पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मण सिंह का निधन
मुजफ्फरनगर। प्रदेश की रामनरेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे लक्ष्मण सिंह (94) एडवोकेट का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। नईमंडी स्थित श्मशान घाट में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता, राजनीतिक दलों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता जाट कॉलोनी निवासी और पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मण सिंह का मंगलवार की रात निधन हो गया। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। मूलरूप से बागपत जनपद के बावली गांव निवासी लक्ष्मण सिंह 61 वर्षों से जनपद में ही रहे रहे थे। वर्ष 1974 और 1977 में वह खतौली सीट से विधायक रहे। प्रदेश की रामनरेश यादव सरकार में वह कैबिनेट मंत्री रहे। उनकी गिनती जिले के ईमानदार राजनीतिज्ञो में होती थी। नई मंडी के श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रशासन की ओर से एडीएम वित्त आलोक कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। थाना सिविल लाइन पुलिस एवं पुलिस लाइन से आए जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पूर्व मंत्री के दिवगंत शरीर को राष्ट्रीय ध्वज से ढका गया। बाद में वैदिक क्रियाओं के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लक्ष्मण सिंह के बड़े पुत्र विंग कमांडर जसवीर सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में पूर्व मंत्री धर्मवीर सिंह बालियान, जिला बार संघ अध्यक्ष कलीराम, जिला बार सचिव अरुण शर्मा, बार संघ के पूर्व सचिव सुरेंद्र मलिक, विकास बालियान, विवेक तोमर, रंजीत चौधरी समेत अन्य लोग मौजूद थे।
दो बार रहे विधायक
मुजफ्फरनगर। लक्ष्मण सिंह जिले में चौधरी चरणसिंह के खास लोगों में गिने जाते थे। वह खतौली विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ताओं में उनकी पहचान रही। पहली बार वह 1974 में बीकेडी से विधायक बने। उन्होंने कांग्रेस के तराबुदीन को पराजित किया था। दूसरी बार 1977 में जनता पार्टी से विधायक बने और कांग्रेस के आनंद प्रकाश त्यागी को हराया। 1977 में विधायक चुने जाने के बाद रामनरेश यादव सरकार में इन्हें मंत्री बनाया गया।
आपातकाल में गए थे जेल
मुजफ्फरनगर। पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह जनता पार्टी के लिए संघर्ष में भी पीछे नहीं रहे। वह आजीवन चौधरी चरणसिंह के ही अनुयायी रहे। वर्ष 1977 में जब देश में आपात काल लगा तो वह विधायक थे। मीसा में पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाला इसके बाद जिले में आंदोलन शुरू हो गया और बड़ी संख्या में लोग जेल गए।