मछली पालन के लिए भी अब मत्स्य पालकों को कृषि कार्ड की तरह सुविधा मिलेगी। इसके लिए जल्द ही अभियान चलाकर मछली पालकों को कृषि कार्ड बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने एक हेक्टेयर या उससे बड़े तालाबों में मछली पालन के लिए फिलहाल दो लाख रुपये की अधिकतम ऋण सीमा तय की है। किसानों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए कृषि कार्ड की सुविधा दी जाती है। इसके जरिये उन्हें सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ऋण दिया जाता है। एक साल के भीतर ऋण जमा करने पर ब्याज का तीन प्रतिशत वापस हो जाता है।
इस तरह किसान को कुल चार प्रतिशत वार्षिक दर पर लोन मिलता है। खाद, बीज, सिंचाई तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित हुई है। अब किसानों की तरह मछली पालकों को भी कृषि कार्ड का लाभ दिया जाएगा। जिले में करीब 500 मछली पालक हैं। एक हेक्टेयर या उससे अधिक के तालाब पर दो लाख रुपये की ऋण सीमा निर्धारित की गई है। सहायक निदेशक मत्स्य आरके श्रीवास्तव ने बताया कि मत्स्य पालकों के कृषि कार्ड बनाने के आदेश प्राप्त हो चुके हैं। बैंकों को भी इस संबंध में केंद्र सरकार से पत्र प्राप्त हो चुका है। जिले में अभियान चलाकर मत्स्य पालकों के कृषि कार्ड बनाए जाएंगे।
अन्य सभी योजनाएं हैं बंद
मत्स्य पालन के लिए राजस्व विभाग से तालाबों के पट्टे तो दिए जाते हैं, लेकिन अनुदान की कोई योजना नहीं है। मत्स्य पालन विभाग की ओर से मछली पालन के लिए कोई सहायता राशि नहीं दी जाती। धनाभाव के कारण जिनके नाम पर तालाबों का आवंटन होता है, वे दूसरों को अपने तालाब सौंप देते हैं। नाम तो आवंटी का रहता है, लेकिन मछली पालन दूसरे लोग करते हैं। कृषि कार्ड बन जाने से तालाब के आवंटियों को काफी लाभ मिलेगा।
मछली बीज के लिए मांगी डिमांड
सहायक निदेशक मत्स्य आरके श्रीवास्तव ने बताया कि मछली पालक मछली बीज के लिए अपनी डिमांड जल्द भेज दें। 30 जून तक मछली बीज के लिए धनराशि जमा करा दें ताकि उन्हें समय से बीज मिल सके।