रतनपुरी। रायपुर नंगली के ई-रिक्शा चालक अनुसूचित जाति के मोहित की मौत के बाद मजदूर परिवार गमजदा है। लेकिन परिजन कार्रवाई नहीं चाहते। वजह यह कि परिवार ने पहले सड़क हादसे में भतीजा खोया, फिर मां और अब भाई की मौत हो गई। लाखों रुपये खर्च हुए, जरूरी मदद नहीं मिली। कहते हैं कि हम मजदूरी करें या फिर पैरवी करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटें।मृतक के बड़े भाई वकील ने बताया कि करीब पंद्रह साल पहले भतीजे आदेश की भी कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिवार ने पैरवी की और करीब एक लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी थी। समाज की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली।
करीब छह वर्ष पूर्व उनकी माता चंद्रो देवी भी बाईपास पर कोहरे में सड़क हादसे का शिकार हो गई थी, लेकिन किसी प्रकार की कोई सहायता नही मिली थी, इसलिए उन्होंने मोहित की मौत के विषय में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कराई है। वह मजदूर है, पैरवी करने के लिए इतने रुपये कहां से लाएं।मृतक मोहित के बड़े भाई वकील ने बताया कि वह छह भाई बहन थे। मृतक मोहित सबसे छोटा था। मोहित के अन्य भाई सुशील, वकील, नीरज उर्फ़ सुक्का, अर्जुन हैं। उधर, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने गांव पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
पुलिस बोली, पिटाई नहीं, बीमारी से हुई मौत
गांव रायपुर नंगली निवासी अनुसूचित जाति के मोहित (22) की ई-रिक्शा कांवड़ियों से टकरा गई थी। कांवड़ियों ने मोहित की पिटाई कर दी थी। परिजन उपचार कराने के बाद मोहित को घर ले गए, लेकिन रविवार को उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि मोहित की मौत पिटाई से नहीं, बल्कि पुरानी बीमारी से हुई है।