राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के चलाए गए वाहन घोटाले में शासन ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। घोटाले में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार समेत 11 लोगों पर दोष सिद्ध करने के लिए जांच प्रारंभ हो गई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग में फिर से घोटाले की फाइलें छानकर रिकार्ड खंगाला गया है। जांच शुरू होने से कई अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें अटक गई हैं।
वर्ष 2015-16 और 2016-17 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन (एनएचआरएम) के तहत वाहन घोटाला किया गया है। पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने 27 बिना टेंडर के वाहन लगाए थे। इनमें 14 वाहन दो साल पुराने और 10 वाहनों का जिले में पंजीकरण नहीं मिला है। इस पूरे खेल में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, डॉ मुकेश कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश कुमार, डॉ संजीव कुमार, लेखा एवं वित्ताधिकारी डॉ देवानंद, पटल सहायक पूरन सिंह समेत 11 लोगों को जांच रिपोर्ट में दोषी माना गया है।
डीएम की रिपोर्ट शासन पहुंचने के बाद आरोपियों को पर दोष सिद्ध करने के लिए जांच पड़ताल प्रारंभ कर दी गई है। शासन के निर्देश पर ऐडी हेल्थ मधु सक्सेना ने घोटाले से संबंधित फाइलों को खंगाल कर जांच पड़ताल की। जांच शुरू होने से कईयों पर कुर्सी छीनने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, विभागीय अधिकारियों ने सीडीओ की जांच में दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई से हाथ खींच लिए हैं। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि लखनऊ से ही जांच-पड़ताल कराई जा रही है। एडी हेल्थ ने भी जांच-पड़ताल की है। अब शासन के हाथ में ही दोषियों पर कार्रवाई की कमान है।