मुजफ्फरनगर। किसानों की सहूलियत के लिए बनाई गई चकबंदी की व्यवस्था सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रही है। नसीरपुर में 15 साल बाद भी किसानों को हक नहीं मिला। किसान प्रदीप शर्मा बताते हैं चकबंदी से चक पाने के लिए पिता सुरेंद्र शर्मा विभाग के चक्कर लगा-लगाकर थक गए थे। बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उनके जीवित रहते हुए जमीन नहीं मिली। अब वह विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
यह व्यथा अकेले प्रदीप शर्मा की नहीं है। गांव के बुजुर्ग किसान धर्म सिंह कश्यप कहते हैं कि वह दफ्तरों के चक्कर लगाते हुए थक चुके हैं लेकिन कर्मचारी उनके चक के बारे में सही बात नहीं बताते। उसका हिस्सा कहां गया। जमीन पर हक कब मिलेगा। इसका जवाब चकबंदी विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है।
15 साल पहले चकबंदी लेखपाल ने किसानों को जा चक आवंटित किए थे, वर्तमान में नए लेखपाल उनके आवंटन को गलत बताकर दोबारा प्रक्रिया की बात कर रहे हैं। सीधे-साधे किसानों को कानून का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन जमीन नहीं दी जाती।र