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बसंतकाल के दौरान ट्रेंच विधि से बुवाई करना किसान के लिए फायदेमंद: तोमर

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कृषक गोष्ठी गन्ना प्रजातियों की जानकारी दी
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देवबंद। कुरलकी गांव में कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें गन्ना अधिकारियों ने गन्ने की विभिन्न प्रजातियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बृहस्पतिवार को आयोजित गोष्ठी में गन्ना शोध परिषद मुजफ्फरनगर के संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेश सिंह व डॉ. अवधेश डाहर ने कृषकों को गन्ने में लगने वाली बामारियों के बारे में विस्तार से बताया तथा बसंतकालीन गन्ना बुआई में गन्ना प्रजाति 0238 के साथ साथ 0118, 98014, 13235 व अन्य प्रगतिशील प्रजातियों के बारे में विस्तृत चर्चा की। बताया कि बसंतकालीन गन्ना बुआई से पूर्व हर खेत में ट्राइकोडरमा का प्रयोग जरूरी हो गया है। इसका कारण है कि पूर्वी व मध्य उत्तर प्रदेश में लाल सड़न रोग का प्रकोप भयानक रुप ले चुका है। जिससे गन्ना प्रजाति 0238 लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि बुआई के समय खेत में दीमक या सफेद सूड़ी नहीं है तो किसी भी कीटनाशक का प्रयोग न करें। डॉ. बीएस तोमर ने कहा कि बुआई के दौरान हर किसान ऊपरी 1/3 भाग की पौधशाला अवश्य लगाएं। इसके साथ साथ बसंतकाल के दौरान अधिकतम बुवाई ट्रेंच विधि से कराएं। जिला गन्ना अधिकारी केएमएम त्रिपाठी ने गन्ना विपणन में आने वाली समस्याओं से निजात की जानकारी द। जयेष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अभय कुमार ओझा ने गन्ना विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में विस्तार से समझाया। इसमें सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव प्रेमचंद चौरसिया, सुशील पंवार, मनोज राणा, संजय कुमार, अभिनव सिंह व आसपास गांव के किसान मौजूद रहे।
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