किसान आंदोलन और स्थानीय मुद्दे हो रहे हावी
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किसान आंदोलन और स्थानीय मुद्दे हावी होते दिखाई दे रहे हैं। इस चुनाव में किसान मताधिकार के लिए अधिक उत्साहित हैं। किसानों से चुनाव के संबंध में बातचीत कर उनके मन को टटोला। इसमें किसानों की जुदा जुदा राय है। कई किसानों का मानना है कि चुनाव में बकाया गन्ना भुगतान और नए कृषि बिल भी चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। जबकि कई किसानों कहना है कि प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गांव की समस्याएं इस चुनाव को जरूर प्रभावित करेंगी।
नए कृषि बिल और बकाया गन्ना भुगतान की समस्या तथा किसान आंदोलन का पंचायत चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गांव की समस्याओं का समाधान एवं विकास का मुद्दा इस चुनाव में हावी रहेगा। यह चुनाव गांव की सरकार बनाने का है।- जितेंद्र मलिक, पूर्व प्रधान गांव फुगाना।
गन्ने के बकाया भुगतान की समस्या किसानों की गंभीर समस्या है, जिसका भाजपा की सरकार उचित समाधान नहीं कर पाई। नए कृषि बिल में कुछ खामियां हैं। बकाया भुगतान की समस्या जिला पंचायत के चुनाव को प्रभावित कर सकती है।- सेवानिवृत्त जिला वन अधिकारी ओमप्रकाश मलिक, फुगाना।
किसान आंदोलन का पंचायत चुनाव में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस चुनाव में स्थानीय समस्याओं का प्रभाव रहेगा। ग्राम प्रधान पद, ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव को गांव की समस्याएं व स्थानीय मुद्दे प्रभावित करेंगे। राजेश संगल, जिलाध्यक्ष अग्रसेन सेवा समिति।
किसान आंदोलन और बकाया गन्ना भुगतान की समस्या इस चुनाव को प्रभावित करेंगी। जिला पंचायत का चुनाव अधिक प्रभावित होगा। स्थानीय मुद्दे चुनाव में हावी रहेंगे। किसान अपने दिल का दर्द मतदान करके दिखाएंगे। योगराज सिंह, रालोद नेता व पूर्व मंत्री।
- गांव के चुनाव को किसान आंदोलन प्रभावित नहीं करेगा। किसान आंदोलन का प्रभाव जिला पंचायत के चुनाव पर जरूर पड़ेगा। गांव के चुनाव में विकास कार्य व ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हावी रहेगा।- हाजी जमशेद, गांव जौला।
- किसान आंदोलन, गन्ने के बकाया भुगतान व स्थानीय समस्याएं इस चुनाव पर हावी रहेंगी। गांव के किसानों में मतदान को लेकर उत्साह है। जिला पंचायत के चुनाव में किसानों की प्रतिक्रिया दिखाई देगी।- चौ. अतहर हसन, उमरपुर।