- कन्नौज से तड़के चार बजे लाया गया सचिन राठी का शव
- गमगीन माहौल में किया गया सिपाही का अंतिम संस्कार
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संवाद न्यूज एजेंसी
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। कन्नौज के धरनीधरपुर नगरिया गांव में हिस्ट्रीशीटर के साथ हुई मुठभेड़ में बलिदान देने वाले सिपाही सचिन राठी का शाहडब्बर गांव में सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गांव में हर आंख नम दिखी, परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए सैंकड़ों लोग पहुंचे।
सिपाही सचिन राठी का पार्थिव शरीर बुधवार तड़के पांच बजे गांव लाया गया। पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो सैंकड़ों लोग जमा हो गए। बेटे का शव देखकर मां गीता गश खाकर गिर गई। बहन अंशु और सिपाही की मंगेतर कोमल का रो-रोकर बुरा हाल रहा। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ के आंसू छलक उठे। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी और एसएसपी संजीव सुमन ने पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। श्मशान घाट में यूपी पुलिस की टीम ने सम्मान के साथ विदाई दी। बड़े भाई जतिन ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान पूर्व मंत्री योगराज सिंह, रालोद विधायक राजपाल बालियान, पूर्व विधायक उमेश मलिक, रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक, ग्राम प्रधान नीरज, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बलबीर सिंह, अशोक राठी, बाबू सिंह राठी, देवेंद्र राठी, पूर्व प्रधान अतर सिंह, हरपाल सिंह, रतन सिंह उपजिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह, सीओ गजेंद्र पाल सिंह, इंस्पेक्टर आनंद देव मिश्र, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अवनीश चौधरी, विजय चौधरी, यशपाल बालियान, अरविंद दुल्हैरा आदि मौजूद रहे।
गम में बदल गईं शादी की खुशियां
परिवार के होनहार बेटे के बलिदान से दो परिवारों के सपने चकनाचूर हो गए। शादी की तैयारियां धरी रह गईं। घर में शादी की खुशियां गम में बदल गईं। गांव में गम का माहौल बना हुआ है। शाहडब्बर गांव के किसान वेदपाल राठी का मझला बेटा सचिन बचपन से ही होनहार था। परिवार को उस पर गर्व था। चार वर्ष पहले सचिन 2019 में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। सचिन के पुलिस में भर्ती होने के बाद से ही परिवार में खुशियां छाई थीं। सचिन को लेकर उसकी मां गीता, बहन अंशु, भाई जतिन व पिता वेदपाल ने सपने संजोए थे। पांच फरवरी को सिपाही कोमल के साथ सचिन की शादी होनी थी। कोमल छपार थाना क्षेत्र के बसेड़ा गांव की रहने वाली है। पिता ने नया घर बनाया। दोनों परिवारों का खुशी का माहौल गम में बदल गया। कोमल भी अपने परिवार के साथ शाहडब्बर पहुंची।