खतौली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाए गए ट्रॉमा सेंटर में नौ वर्ष बाद भी हादसों में घायल लोगों को कोई सुविधा नहीं मिलती है। उच्च स्तरीय मशीनें और स्टाफ न होने से उन्हें उपचार नहीं मिल पाता। घायलों को जिला चिकित्सालय या मेरठ रेफर करना पड़ता है।
जिले में एकमात्र ट्रॉमा सेंटर का शिलान्यास 19 जुलाई 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। इसके निर्माण में 188.36 लाख रुपये का खर्च आया था। नेशनल हाईवे तथा अन्य मार्गों पर हादसों में घायल होने वाले लोगों को सीधे मेरठ रेफर किया जाता है। ट्रामा सेंटर में उच्च स्तर की सुविधाएं हों तो शायद गंभीर घायलों की जान बचाई जा सकती है। विगत दिनों अस्पताल में सीटी स्कैन तथा डिजिटल एक्सरे की मशीन लग चुकी हैं। बिजली कनेक्शन न होने से इन मशीनों को चालू नहीं किया जा सका है।
संचालित होना चाहिए सेंटर
गांव भैंसी निवासी जतिन अहलावत का कहना है कि सीएचसी में ट्रॉमा सेंटर होने के बाद भी घायलों को उच्च स्तर की चिकित्सा नहीं मिल पाती। इसमें उच्च स्तरीय सुविधाएं मिले तो गंभीर घायलों की जान बचाई जा सकती है। इसमें ब्लड बैंक का होना भी जरूरी है। नेशनल हाईवे पर हादसों में घायलों को मेरठ या मुजफ्फरनगर रेफर किया जाता है, जिससे उन्हें उपचार मिलने में देरी हो जाती है। ट्रॉमा सेंटर में सभी सुविधाएं होनी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर मिले सुविधा
गांव नंगला निवासी गंगाराम ने बताया कि उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। वह यहां पर उपचार कराने के लिए आए, मगर यहां पर प्लास्टर आदि की सुविधा नहीं मिली। जिस कारण उनको प्राइवेट चिकित्सक के यहां जाकर उपचार कराना पड़ा। जिससे उनका अधिक पैसा खर्च हो गया। वह यहां पर दवाई लेने के लिए आए थे, मगर चिकित्सक नहीं मिल सके।
सीएचसी चिकित्सा अधिक्षक डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि उच्च स्तरीय सुविधाओं के लिए ब्लड बैंक, आईसीयू में जीवन रक्षा प्रणाली, उच्च विशेषज्ञ चिकित्सक जिसमें प्लास्टिक सर्जन, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन तथा आधुनिक मशीनों के साथ उनको चलाने वाले तकनीकि स्टाफ, मानिटर्स, माइक्रोडि्रप ऑटोमेटिक कंट्रोलर होने से घायल को सुविधाएं मिल सकेंगी। सीएचसी में सीटी स्कैन तथा डिजिटल एक्सरे मशीन लग चुकी हैं, जिन्हें शीघ्र चालू किया जाएगा।