पुरकाजी। खादर क्षेत्र गांव रामनगर के पास सोलानी नदी पर लोहे का पुल नहीं होने से गांव रामनगर, रजगल्ला पुर, शेरपुर नगला, रतन पुरी के ग्रामीण परेशान हैं। बरसात के दिनों में महीनों तक ग्रामीण नाव के सहारे नदी पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमारी पीढियां गुजर गई, लेकिन नदी पर मात्र 100 मीटर लंबा लोहे का पुल नहीं बन पाया है।
पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र का यह गांव करीब वर्ष 1958 में बसाया गया था। इन गांवों में अधिकांश प्रजापति समाज के लोग निवास करते हैं। ग्रामीणों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं।
गांव रामनगर निवासी राजू प्रजापति व गांव शेरपुर नगला निवासी यादराम प्रजापति ने बताया कि वर्ष 1958 में गाजियाबाद के कस्बा मुरादनगर व बागपत के बड़ौत क्षेत्र के प्रजापति समाज के भरतार सिंह प्रजापति, तेजराम प्रजापति, बुधन सिंह प्रजापति, नानक प्रजापति, चंद्र प्रजापति, पूरन सिंह प्रजापति, किशन लाल प्रजापति, सुरजी प्रजापति, टीकम प्रजापति, कृपाराम प्रजापति, कल्याण सिंह प्रजापति, मदनलाल प्रजापति आदि बहुत से लोगों ने जमीन लेकर के यह गांव बसाया था।
गांव का नाम भगवान श्रीराम के नाम पर रामनगर रखा गया था। मगर 67 वर्ष गुजर जाने के बाद भी आज तक गांव में जाने का कोई मुख्य रास्ता नहीं है। सोलानी नदी पार करने के लिए काफी समय से यहां के ग्रामीण एक लोहे के पुल की मांग करते आ रहे हैं।
प्रशासन की ओर से कुछ दिनों के लिए नदी पर एक नाव लगा दी जाती है। ग्रामीण नाव में बैठकर ही नदी पार कर खेतों व अपने गंतव्य तक पहुंच पाते हैं।
बरसात के दिनों के बाद नाव हटा ली जाती है। पूरे वर्ष सोलानी में करीब सात फीट पानी रहने के कारण ग्रामीण नदी पार नहीं कर पाते हैं। नदी पर नाव का इंतजाम नहीं होने से किसानों व मजदूरों को आधे किलोमीटर का रास्ता करीब छह किलोमीटर का चक्कर काटकर खेतों पर जाना पड़ता है और ग्रामीणों पशुओं के लिए चारा तक नहीं ला पाते हैं। छात्र-छात्राओं को भी स्कूल जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांवों से बाहरी क्षेत्रों में जाने वाले ग्रामीणों को गांव धुममनपुरी, पांचली, भदौला, खेड़की का करीब 10 किलोमीटर का चक्कर काटकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 67 वर्षों से ग्रामीण गांव रतन पुरी व रामनगर के बीच मात्र 100 मीटर लोहे का पुल बनवाने की मांग क्षेत्र के सांसदों व विधायकों से करते आ रहे हैं। लेकिन सोलानी नदी का पुल नहीं बन पाया है। संवाद