संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। पुरबालियान गांव में करीब 38 साल से चल रही चकबंदी को लेकर विवाद हो गया। इस मामले में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को डीएम आवास का घेराव किया। साथ ही मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। पीड़ितों के साथ पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चकबंदी प्रक्रिया में गरीब और अनुसूचित जाति के लोगों को उनका हक नहीं मिल रहा। वहीं प्रभावशाली लोग लाठी के बल पर जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
डीएम आवास पर प्रदर्शन के दौरान भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज पहलवान ने बताया कि गांव पुरबालियान में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान करीब 38 साल पहले अनुसूचित जाति की बस्ती के लिए 12 बीघा जमीन आरक्षित की गई थी। उस समय कुछ लोगों ने चकबंदी को बंद कराने के लिए आपत्ति दर्ज की थी, लेकिन उनकी आपत्ति निरस्त हो गई।
बावजूद, कुछ लोग अभी भी इस हरिजन बस्ती को उजाड़कर दूसरी जगह बसाने पर आमादा हैं, जबकि जिसकी भूमि पर बस्ती आरक्षित की गई थी, उसको कोई एतराज नहीं है, क्योंकि उसे इसके एवज में कहीं दूसरी जगह भूमि मिल चुकी है। इस मामले में सीओ कोर्ट से भी फैसला आ चुका है।
आरोप है कि ग्रामीण पदम जब नकल लेने के लिए सीओ कोर्ट गया तो वहां उसके साथ अभद्रता की गई। बताया कि इस मामले को लेकर एसओसी और सीओ चकबंदी से भी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज पहलवान ने कहा कि मामले को लेकर डीएम ने सुनवाई की। आश्वस्त किया कि नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी। बताया कि डीएम के आदेश पर एडीएम प्रशासन और तहसीलदार को जांच के लिए नामित किया गया, जो गांव में जाकर जांच कर रिपोर्ट देंगे। सलीम बालियान, ग्राम प्रधान शौकत अली, कंवरपाल, चन्द्रवीर सिंह आदि शामिल रहे।