- चीनी मिलों और गन्ना विभाग के सर्वे में सामने आए तथ्य
- क्षेत्रफल बढ़ने के बाद भी इस बार मिलों में कम रहेगी आपूर्ति
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले में गन्ने की फसल पर मौसम परिवर्तन का असर पड़ा है। इस बार पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ़ने के बावजूद पिछले वर्ष के मुकाबले 50 लाख क्विंटल गन्ने की कम पैदावार होने की संभावना है। गन्ना विभाग और चीनी मिलों के ताजा सर्वे यह रिपोर्ट सामने आ रही है।
जिले की आठ चीनी मिलों में पिछले पेराई वर्ष सत्र 2022-23 में 10 करोड़ 35 लाख 48 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। गन्ना विभाग और चीनी मिलों के सर्वे की माने तो इस बार चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति दस करोड़ क्विंटल से कम हो सकती है। जिले में गन्ने का क्षेत्रफल एक लाख 76 हजार हेक्टेयर है जो गत वर्ष से पांच हजार हेक्टेयर अधिक है। गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने के बाद भी गन्ना उत्पादन 50 लाख क्विंटल कम रहने की संभावना है।
चीनी का उत्पादन पिछले वर्ष 105 लाख 71 हजार क्विंटल था उसके 100 लाख क्विंटल तक ही पहुंचने की संभावना है। अब तक 629 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई से 65.69 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हो चुका है। पेराई सत्र के भी जल्दी समाप्त होने की संभावना है।
पांच साल से लगातार बढ़ रहा उत्पादन
वर्ष गन्ना उत्पादन प्रति हेक्टेयर
2018-19 864 क्विंटल
2019-20 866 क्विंटल
2020-21 907 क्विंटल
2021-22 933 क्विंटल
2022-23 948 क्विंटल
चीनी मिलों में गत वर्ष की गन्ना पेराई
चीनी मिल गन्ना पेराई लाख क्विं
खतौली 248.54 ला.क्विं
तितावी 162.44 ला.क्विं
भैसाना 126.45 ला.क्विं
मंसूरपुर 147.38 ला.क्विं.
टिकौला 185.20 ला.क्विं
खाईखेड़ी 77.12 ला.क्विं
रोहाना 38.18 ला.क्विं
मोरना 30.17 ला.क्विं
इस बार कम रहेगा उत्पादन : सिसोदिया
जिला गन्ना अधिकारी संजय सिसोदिया का कहना है कि गत वर्ष के मुकाबले इस बार गन्ने का उत्पादन कम रहेगा। अनुमानत: इस बार 50 लाख क्विंटल गन्ना कम निकल सकता है। चीनी मिलों और गन्ना विभाग के प्रारंभिक सर्वे में यह सामने आ रहा है। गन्ना शोध केंद्र के प्रभारी डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि प्रत्येक फसल मौसम से जुड़ी है। मौसम के समय से पहले आने और देरी से आने का सीधा असर फसलों पर पड़ता है। इस बार समय से पहले मानसून आने से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है।