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नालियों में तब्दील हुए नाले, जलनिकासी के लाले

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नाला के ऊपर बना पुरानी घास मंडी का मार्किट। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- शहर में 105 छोटे और बड़े नालों के जरिए जलनिकासी की व्यवस्था
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- बरसाते होते ही शहर की कॉलोनियों में भरने लगता है पानी
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। शहर की आबादी बढ़ती गई, लेकिन जलनिकासी के इंतजाम अधूरे हैं। जहां पहले बड़े नाले थे, अब नालियां दिख रही हैं। बरसात होते ही पानी घरों में घुस जाता है। यही वजह है कि बरसात में 105 नाले और नालियों से भी निकासी सुचारु तरीके से नहीं हो पाती। आर्यपुरी से एसडी कॉलेज मार्केट तक जाने वाले नाले की सफाई नहीं हुई। यह नाला दुकानों और मकानों के नीचे से होकर गुजरता है। पुरानी घास मंडी रोड से अहिल्याबाई चौक तक जाने वाले नाले के आधे हिस्से में नगरपालिका ने दुकानों का निर्माण करा दिया। इससे नाले की सफाई व्यवस्था ठप हो गई। गंगारामपुरा से अहिल्याबाई चौक तक बरसात के दौरान जलनिकासी में परेशानी हो रही है। अरोरा क्वार्टर से काके की पुलिया तक नाले को नालियों में तब्दील कर दिया गया है। शहर के रुड़की रोड के नाले भी अब नालियों में बदल रहे हैं। मल्हूपुरा में भी नाले अब नालियों में तब्दील हो गए हैं, जिससे जलनिकासी में परेशानी है।
इन चार नालों से नदी में जाता है पानी
शहर में 105 छोटे-बड़े नालों का पानी चार बड़े नालों के माध्यम से काली नदी में जाता है। इनमें खालापार, रामलीला टिल्ला आबकारी का नाला, बचन सिंह कॉलोनी और नई मंडी से अलमासपुर के रास्ते से निकलने वाला नाला शामिल है। बचन सिंह कालोनी और नई मंडी के नालों का पानी संधावली वाले नाले के माध्यम से काली नदी में जाता है।
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आधा-अधूरा किया गया निर्माण
पुरानी घास मंडी रोड गंगारामपुरा निवासी अकील अहमद सिद्दीकी का कहना है कि नालों को नालियों में तब्दील कर दिया गया है। घास मंडी से अहिल्याबाई चौक तक जाने वाले नाले पर जलनिकासी के इंतजाम नहीं है। अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
बरसात होते ही बंद हो जाते हैं रास्ते
रामलीला टिल्ला रोड के नीरज का कहना कहना है कि जब बरसात होती है और लद्दावाला और चुंगी नंबर दो से आने वाले नाले का पानी एक साथ इस नाले में आता है तो ओवरफ्लो हो जाता है। कभी-कभी तो मुख्य रास्ता बंद हो जाता है। घरों में पानी चला जाता है। यह शहर का सबसे पुराना नाला है, लेकिन यहां के लोगों की समस्या आज तक दूर नहीं हुई।
जहां नाला छोटा हुआ, वहीं जलभराव
बकरा मार्केट के डेयरी संचालक गय्यूर का कहना है कि इस नाले में अस्पताल, कच्ची सड़क आदि का पानी आता है। आगे जाकर नाला छोटा होता चला जाता है, जिससे नाले के आस-पास के रहने वाले परिवारों के लिए समस्या बढ़ जाती है।
नाला तंग है, इसलिए बढ़ती है मुश्किल
बकरा मार्केट के डॉ. सीबी अरोरा का कहना है कि जहां नाला चौड़ा होना चाहिए, वहां तंग है। इसी वजह से बरसात होते ही जलनिकासी की समस्या बढ़ जाती है। यहां सफाई कर्मी साल में एक बार ही आते हैं। रामलीला टिल्ला रोड पर इस नाले में लद्दावाला का नाला मिल जाता है। यहां समस्या बन जाती है।
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बिना एक रुपया खर्च किए कराई नाला सफाई : अंजू
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि 12 अप्रैल 2019 से प्रतिदिन नालों की सफाई करा रहे हैं। नाला सफाई के लिए अलग से टीम बनाई है। यह टीम प्रतिदिन किसी एक नाले की सफाई करती है। अपने कार्यकाल में नाला सफाई पर एक भी अतिरिक्त रुपया खर्च नहीं किया। पहले साल ही 70 लाख का प्रस्ताव आया था। हमसे पहले हर साल नाला सफाई पर करोड़ों खर्च होता था।
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