राष्ट्रपति शिक्षक दिवस पर जैन इंटर कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर वशिष्ठ भारद्वाज को राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड से अलंकृत करेंगे। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रदेश से चुने गए 11 माध्यमिक शिक्षकों में डॉक्टर भारद्वाज भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित डॉक्टर वशिष्ठ भारद्वाज को विज्ञान और अन्य वैज्ञानिक प्रोग्राम में सहभागिता तथ उत्कृष्ट कार्यों के लिए नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। भारद्वाज की उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि उनके पिता शिवकुमार शर्मा इसी कालेज से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
परिवार का शिक्षा से गहरा नाता है। उनकी माता शकुंतला देवी शिक्षा सदन इंटर कालेज की अध्यापिका रही हैं। वर्ष 1991 में भारद्वाज की नियुक्ति प्रवक्ता पद पर हुई थी। शैक्षिक राष्ट्रीय कार्यक्रमों और विज्ञान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उनके निर्देशन में उल्लेखनीय प्रतिभा पाई।
राष्ट्रपति से सम्मान पाने की खुशी से डॉक्टर वशिष्ठ गौरवान्वित हैं। भारद्वाज कहते है कि राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड से छात्र-छात्राओं के बौद्धिक, शैक्षिक और सर्वागीण विकास के लिए और अधिक कार्य करने की ऊर्जा मिलेगी।
राष्ट्र निर्माता है शिक्षक
चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉक्टर लक्ष्मण सिंह टांक ने कहा कि शिक्षक की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण से ही शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण होता है। शिक्षक राष्ट्र निर्माता है। गुरुकुल परंपरा में आचार्य का उच्च स्थान था। शिक्षक के आचरण और व्यवहार का विद्यार्थी के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। शिक्षा में आई व्यावसायिकता ने गुरु-शिष्य परंपरा को खंडित किया है। उत्तम शिक्षक का सम्मान छात्र-छात्राएं जीवन भर करते है।
उधर, स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर एवं समाज सेवी सोमनाथ भाटिया ने कहा कि सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन ने कहा था कि केवल पुस्तकीय शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी को संस्कारित करना अध्यापक का कर्तव्य है। युवा पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति जागरूक करना, भारतीय संस्कृति का ज्ञान देना और माता-पिता, गुरु एवं समाज के प्रति सेवा का भाव पैदा करने का दायित्व भी शिक्षक पर है।