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'गोल्ड' के साथ जीता मां का दिल, डोली बनीं भारत की सबसे कम उम्र की शूटर, हर कोई करेगा सलाम

Mon, 20 Aug 2018 08:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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एक श्रमिक महिला की बेटी अपने मजबूत इरादों के बल पर कामयाबी की मंजिल की ओर आगे बढ़ रही है। अचूक निशानेबाजी के बल पर डोली देश में सबसे कम उम्र की शूटर बन गई है। मात्र नौ साल की डोली जाटव राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर अपने हौसले की धाक जमा चुकी है। बागपत जिले के जोहड़ी गांव की इस शूटर को बीएसएफ ने गोद ले लिया है। मोरना के इंद्रप्रस्थ स्कूल में आई डोली कहती है कि श्रमिक मां के फैसले ने मुझे जिंदगी की नई राह दिखाई है।  जानें कैसे मां कि जिद ने डॉली को दिलाई बड़ी कामयाबी :-

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ईंट के भट्टे पर मजदूरी कर मां ने की परवरिश

भट्ठा श्रमिकों की जिंदगी से जद्दोजहद का सच किसी से छिपा नहीं है। हर रोज ईंट पथाई कर अपने पांच बच्चों की परवरिश कर रही सुनीता ने खुद के गांव जोहड़ी में जब बेटियों को शूटिंग सीखते देखा,तो वह बेटी डोली का हाथ पकड़ रेंज पर ले गई। प्रशिक्षक डॉ राजपाल सिंह ने कम उम्र बता कर ट्रेनिंग से इंकार कर दिया। इसके बावजूद महिला ने बेटी डोली को सही राह दिखाने के लिए एक साल तक प्रशिक्षक से आग्रह करती रही। अंत में प्रशिक्षक ने भी अंत में डोली को सिखाने के लिए हामी भर दी।

डोली के पास न अपनी पिस्टल थी और न ही महंगे खेल शूटिंग का खर्च वहन करने की क्षमता। डोली दूसरे शूटर्स की गन से प्रेक्टिस करने लगी। उसकी मेहनत का रंग जयपुर में दिखा। कक्षा तीन की छात्रा डोली बताती है कि पिता संजय और मां सुनीता भट्ठे पर हर रोज ईंट पाथती है। मां नहीं चाहती थी कि मैं भट्ठे पर मजदूरी में हाथ बटाऊं। अभाव की जिंदगी के बावजूद मां ने शूटिंग रेंज में बेटी का दाखिला करा दिया। 
 
कई प्रतियोगिताओं में जीते हैं पदक
जुलाई 2017 में जयपुर में महाराजा डॉ कर्ण सिंह शूटिंग चैंपियनशिप में 25 मीटर एयर पिस्टल .22 बोर में सीनियर वर्ग में डोली ने सिल्वर मेडल जीता। जूनियर वर्ग में उसे कांस्य पदक मिला। बीएसएफ इंदौर के महानिदेशक केके शर्मा ने उसे प्रशिक्षण के लिए गोद ले लिया है। ट्रेनिंग के लिए पिस्टल और बुलेट बीएसएफ देती है। साईं कोच नीतू स्योराज उनकी प्रशिक्षक हैं। लखनऊ में यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में एयर पिस्टल स्पर्धा में डोली ने स्वर्ण पदक जीता। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने उसे स्वच्छ भारत मिशन का एंबेसडर बनाया है। वह भविष्य में देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना चाहती है। 
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शूटिंग में सबसे ज्यादा पदकों की उम्मीद: वर्तिका 

अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज वर्तिका सिंह को उम्मीदें है कि जकार्ता एशियाड में शूटिंग में भारत को सबसे ज्यादा पदक मिलेंगे। शूटर इंचियोन एशियाड में जीते नौ पदकों का रिकार्ड तोड़ देंगे। इंद्रप्रस्थ स्कूल मोरना में आई वर्तिका ने छात्राओं को शूटिंग के टिप्स दिए। प्री नेशनल तथा यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी वर्तिका सीआरपीएफ को निशानेबाजी की ट्रेनिंग देती है। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही है। इंद्रप्रस्थ कॉलेज फार वुमेन छात्रसंघ की अध्यक्ष रह चुकी है।

प्रतापगढ़ के राजचंदरपुर गांव की निवासी वर्तिका सिंह को वर्ष 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया था। जर्मनी और सिंगापुर की शूटिंग प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है। एयर पिस्टल उनकी पसंदीदा स्पर्धा है। वर्तिका बताती है कि कस्तूरबा गांधी रिहानबाड़ी गोरखपुर स्कूल की छात्राओं को भी वह प्रशिक्षण दे रही है। शूटिंग में बालिकाओं के लिए चमकने के ज्यादा मौके हैं। 

प्रशिक्षु रवि ने जीता जकार्ता में कांस्य पदक 
बागपत जिले के गांव जोहड़ी में शूटिंग रेंज स्थापित कर सुर्खियां पाने वाले डॉ राजपाल सिंह का जीवन शूटिंग को समर्पित है। उनकी प्रशिक्षु निशानेबाज सेना, एयर इंडिया और सीआरपीएफ में करियर बना चुकी है। 68 वर्षीय डॉ राजपाल सिंह ने वर्ष 1998 में जोहड़ी रायफल एसोसिएशन की स्थापना की थी। उनके बेटे विवेक कुमार निशानेबाजी में अर्जुन अवार्डी है, जबकि बेटी डॉ मीनाक्षी अमेरिका में चिकित्सक है।
उन्होंने बताया कि जकार्ता एशियाड में हमारे चार शूटर रवि कुमार, अखिल श्योराण, सीमा तोमर, सौरभ चौधरी भाग ले रहे है। दस मीटर एयर रायफल मिश्रित युगल में भैंसा (मेरठ) गांव के रवि कुमार ने अपूर्वी चंदेला के साथ मिल कर जकार्ता में कांस्य पदक जीत लिया है।  

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