दारुल उलूम में पहली बार डीएम ने किया ध्वजारोहण, हुआ राष्ट्रगान
देवबंद (सहारनपुर)। देश के 73वें स्वतंत्रता दिवस पर विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम में जश्न-ए-आजादी शीर्षक से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें डीएम आलोक कुमार पांडेय और एसएसपी दिनेश कुमार समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, उलमा, मदरसा छात्रों और नगरवासियों ने शिरकत की। पहली बार दारुल उलूम में ऐसा भव्य आयोजन हुआ, ध्वजारोहण के साथ ही छात्रों और उलमा ने राष्ट्रगान गाया और पहली बार ही किसी डीएम ने दारुल उलूम में पहुंचकर ध्वजारोहण किया।
बृहस्पतिवार को एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया के सामने आजमी मंजिल के विशाल मैदान में दारुल उलूम ने स्वतंत्रता दिवस धूमधाम के साथ मनाया। संस्था के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी, डीएम आलोक कुमार पांडेय, एसएसपी दिनेश कुमार और सांसद फजलुर्रहमान ने संयुक्त रुप से ध्वजारोहण किया और दारुल उलूम के छात्रों ने राष्ट्रगान गाया। इस अवसर पर डीएम आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हम सभी का स्वाधीनता दिवस है। देवबंद पवित्र मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे बड़ा सेंटर है। यहां कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है और मैं खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि देवबंद के इस वातावरण में भारत के झंडे को देखकर मेरा रोम रोम आनंदित हो रहा है।
एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता एक शब्द नहीं बल्कि जीवन का मूल्य है और जीवन जीने के लिए स्वतंत्रता का होना बेहद जरूरी है। स्वतंत्रता का मतलब इज्जत भी होता है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वह देवबंद की पवित्र धरती पर दारुल उलूम के कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहे हैं। साथ ही उन्होंने जोश भरते हुए कहा कि दारुल उलूम में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र कल आईपीएस, आईएएस और आईआरएस बनेंगे।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि हमारे बुजुर्गों की कुर्बानियों के सदके से यह मुल्क आजाद हुआ। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनकी कुर्बानियों का जिक्र करें। मदनी ने कहा कि सन 1799 में टीपू सुल्तान को जब शहीद किया गया तो अंग्रेजों ने उनकी लाश पर खड़े होकर यह एलान किया था कि आज हिंदुस्तान हमारा है। सन 1803 में सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने एलान किया कि आज से यहां ईस्ट इंडिया कंपनी का हुक्म चलेगा। इसके बाद प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन शाह अब्दुल अजीज (मोहद्दीस देहलवी) ने एलान किया कि आज हमारा मुल्क गुलाम हो गया और इस गुलामी से निजात दिलाने के लिए जिहाद करना हर मुसलमान का फर्ज है। मौलाना मदनी ने कहा कि किसी राजा-महाराजा, नवाब के अंदर यह ताकत नहीं थी कि अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करे, लेकिन उलमा-देवबंद ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा जारी किया।
संस्था के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने कहा कि दारुल उलूम की स्थापना का उद्देश्य ही अंग्रेजों से मुल्क को आजाद कराना था और वह अपने इस मिशन में कामयाब भी रहा। इनके अलावा सहारनपुर सांसद फजलुर्रहमान, एडीएम (ई), एडीएम (एफ), श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा, कर्नल राजीव सिंह आदि ने भी विचार रखे।
मदनी ने शेखुल हिंद मेडिकल कालेज की बदहाली बयान की
देवबंद। मौलाना अरशद मदनी ने अधिकारियों के सामने शेखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन के नाम पर शासन द्वारा सहारनपुर में खोले गए मेडिकल कालेज की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि आजादी के मतवाले के नाम पर मेडिकल कालेज खोला गया, लेकिन उसमें डॉक्टर और मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। शासन से सवाल किया कि अगर यह कालेज शेखुल हिंद के नाम की जगह किसी दूसरे महापुरुष के नाम पर होता तो क्या आज उसकी यही हालत होती?। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह देश नफरत की सियासत से नहीं बल्कि प्यार और मोहब्बत से चलेगा।
दारुल उलूम छात्रों को दे आईएएस आईपीएस की कोचिंग
देवबंद। जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में कहा कि दारुल उलूम छात्रों को आईएएस और आईपीएस की कोचिंग भी दे। ताकि वह उच्च पदों पर बैठकर देश सेवा में बढ़ चढक़र हिस्सा ले सकें।
यह लोग रहे शामिल
एसडीएम राकेश कुमार, सीओ अजेय शर्मा, तहसीलदार आशुतोष कुमार, मौलाना मुजीबुल्लाह गोंडवी, अल्लामा कमरुद्दीन, दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना महमूद हसन राजस्थानी, मौलाना अनवारुल रहमान बिजनौरी, कारी शफीक, कारी फौजान, नजर फाउंडेशन के अध्यक्ष नजम उस्मानी, अब्दुल्ला मारुफी, मौलाना अफजल कैमूरी, जमाल नासिर उस्मानी, तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के उप प्रभारी अशरफ उस्मानी, अरशद खां, शमशाद जंग, तहसीन खां, डाक्टर शब्बीर करीमी आदि मौजूद रहे।
दारुल उलूम में राष्ट्रगान के लिए नियुक्त थे तीन लोग
देवबंद। दारुल उलूम हमेशा से राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराया जाता रहा है। इतना ही नहीं दारुल उलूम ने राष्ट्रगान गाने के लिए तीन लोगों को नियुक्त किया हुआ था। संस्था के तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के उप प्रभारी अशरफ उस्मानी ने बताया कि मो. इनाम, अजहर सिद्दीकी और वजाहत उस्मानी को राष्ट्रगान गाने के लिए नियुक्ति की हुई थी। वर्तमान में अहमद खान और असजद खान को इसी जिम्मेदारी दी हुई है।
चेयरमैन मोहम्मद उस्मान दोनों जगह ध्वजारोहण करते थे
देवबंद। 23 वर्षों तक देवबंद के चेयरमैन रहे मोहम्मद उस्मान पालिकाध्यक्ष होने के साथ साथ दारुल उलूम के नायब मोहतमिम भी रहे। इतना ही नहीं बतौर उस्ताद-ए-हदीस वह दारुल उलूम में छात्रों को पढ़ाते भी थे। जो हर साल नगर पालिका और दारुल उलूम में ध्वजारोहण करते थे।
दारुल उलूम देवबंद में जश्न ए आजादी कार्यक्रम में मंचासीन अतिथिगण।- फोटो : DEVBAND
दारुल: उलूम देवबंद में स्वतंत्रता दिवस पर जश्न ए आजादी कार्यक्रम में मौजूद छात्र, उलमा और अन्य लो?- फोटो : DEVBAND
दारुल उलूम देवबंद में स्वतंत्रता दिवस पर हुआ ध्वजारोहण- फोटो : DEVBAND