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दिव्या काकरान का ओलंपिक में खेलने का सपना टूटा

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दिव्या का ओलंपिक में खेलने का सपना टूटा
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मुजफ्फरनगर। पहलवान दिव्या काकरान टोक्यो ओलंपिक में भाग नहीं ले पाएंगी। ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने का उसका सपना पूरा नहीं हो सका। जिसके लिए वह चार साल से तैयारी कर रही थीं। ओलंपिक क्वालीफाइंग में उसे मौका नहीं दिया गया। उसके पिता सूरज पहलवान ने भारतीय कुश्ती संघ पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। पिता का कहना है कि दिव्या के साथ गलत हुआ है, उसे मौका मिलना चाहिए था।
दिव्या काकरान 68 किलो वर्ग में टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही थीं। हालांकि मार्च माह में लखनऊ के साईं सेंटर में हुए ओलंपिक क्वालीफाइंग में वह इस वर्ग में हार गई थी, जिस कारण हरियाणा की निशा मलिक का चयन इस वर्ग में हो गया था। महिला के 72 किलो वर्ग में कोई दावेदार नहीं होने पर उसने अपनी दावेदारी की थी। कई पहलवानों को हराकर वह एशियन चैंपियनशिप कजाकिस्तान में पहुंची थी, जिसमें 27 अप्रैल को उसने गोल्ड मेडल जीता था।
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अब बुल्गारिया में गत दिवस ओलंपिक क्वालीफाइंग हुए। दिव्या के पिता सूरज ने बताया कि इस क्वालीफाइंग में 68 किलो वर्ग में निशा मलिक हार गई, जबकि कुश्ती संघ ने 74 किलोग्राम वर्ग में पंजाब के पहलवान संदीप सिंह के स्थान पर हरियाणा के पहलवान अमित धनकड़ को मौका दिया, जबकि अमित धनकड़ पहले क्वालीफाई नहीं कर पाया था।
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सूरज पहलवान का कहना है कि कुश्ती संघ को ऐसे ही दिव्या का भी मौका देना चाहिए था, मगर संघ ने भेदभाव किया, जिससे दिव्या ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने से वंचित रह गई, वह अब टोक्यो ओलंपिक में भाग नहीं ले सकेंगी। चार साल से इसके लिए तैयारी कर रही थी, जिससे दिव्या काफी हताश है।
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