महिला जिला अस्पताल की नई चमचमाती बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। निर्माता कंपनी ने अभी हैंडओवर करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके पीछे अस्पताल में हाईटेंशन लाइन का विद्युत कनेक्शन रोड़ा बना हुआ है। आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल में सबसे महत्वपूर्ण आक्सीजन की पाइप लाइन पर सस्पेंस बना हुआ है। ऑक्सीजन पाइप लाइन को लेकर अधिकारी एकमत नहीं है। इससे करोड़ों रुपये से बनी बिल्डिंग में प्रसव ही कराए जा सकते हैं।
जिला महिला चिकित्सालय काफी पुराना हो चुका है। इसके चलते एक सौ बेड की नई बिल्डिंग बनाई गई है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आर्गेनाइजेशन (एनएचएम) के तहत जी प्लस फाइव श्रेणी का छह मंजिला नया अस्पताल बनाया गया है। निर्माण करने की जिम्मेदारी गाजियाबाद की एचएससीसी कंपनी को दी गई है। कंपनी बीते दो साल से इसका निर्माण कर रही है। अस्पताल अप्रैल माह में चालू होना था, लेकिन विधानसभा चुनावों में बजट नहीं मिल सका।
इसके बाद अब काम ने रफ्तार पकड़ी तो हाईटेंशन विद्युत कनेक्शन रोड़ा बन गया है। हालांकि अस्पताल में सुविधाओं पर गौर करें, तो सबसे महत्वपूर्ण ऑक्सीजन पाइप लाइन पर सस्पेंस बना है। बिल्डिंग हैंडओवर नहीं होने से जिला स्वास्थ्य प्रशासन निरीक्षण करने से हाथ खड़े कर रहा है। जबकि निर्माता कंपनी ने साफ किया है कि अस्पताल में आईसीयू नहीं है।
ऑक्सीजन की पाइप लाइन आईसीयू में बिछाई जाती है। सीएमएस अमिता गर्ग ने बताया कि अस्पताल अप्रैल तक चालू होना था, लेकिन कभी कुछ तो कभी किसी कमी के कारण बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हो सकी है। इससे परेशानी बनी हुई है। उधर, निर्माता कंपनी के डीजीएम रवि रंजन ने बताया कि बिल्डिंग पूरी तरह से तैयार है, कुछ कमी बाकी है। जिन्हें पूरा कराया जा रहा है। जल्द ही अस्पताल का पूरा कार्य निपटा लिया जाएगा।
ऐसा है नया महिला अस्पताल
मुजफ्फरनगर। महिला चिकित्सालय ओपीडी, ओटी, कलर डोपलर, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, लैब, एसएनसीयू आदि एयरकंडीशनर होने के साथ आधुनिक सुविधाओं लैस किए जाएंगे। अस्पताल में आपातकाल में आग या अन्य ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए फायर फाइटिंग की लाइन बिछाई गई है।
स्टॉफ बनेगा इलाज में रोड़ा
मुजफ्फरनगर। पुराने महिला चिकित्सालय में चिकित्सकीय स्टॉफ की कमी है, जिसके चलते नई बिल्डिंग बनने से और दिक्कतें खड़ी होने वाली हैं। वर्तमान में अस्पताल के भीतर स्टॉफ की करीब 40 फीसदी कमी है। पैरामेडिकल से लेकर स्टॉफ नर्स, चिकित्सक सबकी कमी है, जबकि अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक है। पुराने अस्पताल में एक सौ बेड की व्यवस्था, लेकिन यहां करीब 140 बेड डाले गए हैं।
हर माह 1000 डिलीवरी, 300 आपरेशन
मुजफ्फरनगर। महिला जिला चिकित्सालय में मरीजों के दबाव के कारण हालात बुरे हैं। हर माह अस्पताल में करीब एक हजार से अधिक डिलीवरी होती हैं, जबकि 300 ऑपरेशन किए जाते हैं। वर्ष 2016 में जनवरी से दिसंबर तक करीब 11 हजार महिलाओं की डिलीवरी की गई। तीन हजार से अधिक आपरेशन किए गए।