खतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर समीक्षा करते हुए टीम।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर, खतौली। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे टीबी के मरीजों के उपचार और उनकी देखरेख को लेकर डब्लूएचओ की टीम ने खतौली पहुंचकर समीक्षा बैठक ली। मुजफ्फरनगर प्रदेश के उन 10 जिला में से एक है, जिन्हें अवार्ड के लिए चिंहित किया गया। 15 टीमें चिहिंत गांवों में जाकर टीबी की खोज के लिए सर्वे कर रहे है।
डब्लू एचओ की चार सदस्य टीम डॉ श्रुति सहगल, डॉ दीपक, डॉ अश्विन, डॉ उमर के साथ जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने वहां पर बनाई गई टीबी के मरीजों की लैब की जांच करने के साथ ही दस्तावेजों की भी जांच की गई। डब्लूएचओ की टीम ने 2018 के टीबी के मरीजों के रिकार्ड को देखते हुए मरीजों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने मरीजों से दवाई, चिकित्सकों के व्यवहार सहित खाते में आने वाले पैसों की जानकारी ली। मरीजों द्वारा बताई गई बात से टीम संतुष्ट नजर आई। डॉ लोकेश गुप्ता ने बताया कि टीबी के मरीजों की जांच के लिए टीमों का गठन किया गया है।
मुजफ्फरनगर प्रदेश के उन 10 जिला में से एक है जिन्हे अवार्ड के लिए चिन्ह्ति किया गया। 15 टीमें चिहिंत गावों में जाकर टीबी की खोज के लिए सर्वे कर रहे है। पांच साल का कार्य देखा जा रहा है। 2015 के मुकाबले बीस प्रतिशत मरीजों अच्छे उपचार से कम हुए। खतौली क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से टीम डोर टू डोर जाकर सर्वे करने में लगी है। अभी तक लगभग 350 मकानों का सर्वे किया जा चुका है। उनमें से सात मरीजों के सैंपल भी लिए गए है। उन्होंने बताया कि टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।