जिला कारागार से उम्रकैद की सजा काट रहे तीन कैदियों की रिहाई हो सकती है। जल्दी ही डीएम और एसएसपी जेल पहुंचेंगे। अफसरों के सामने कैदियों को पेश किया जाएगा। अफसर अगर पूछताछ से संतुष्ट हुए तो तीन बुजुर्ग कैदियों की रिहाई के लिए नाम शासन को भेजे जाएंगे। सजा पूरी होने से पहले ही कैदियों को मिलने वाली रिहाई से परिजनों के चेहरे खिल गए हैं।
आगरा सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे तीन कैदियों को एक सप्ताह पूर्व जिला कारागार में भेजा गया है। तीनों कैदी शहर कोतवाली के रामलीला टिल्ला निवासी दल सिंह (62) पुत्र बुद्धसिंह, चरथावल के कान्हाहेड़ी निवासी मनफूल (65) पुत्र भुल्लन और फुगाना के गांव जोगियाखेड़ा निवासी सईद (60) पुत्र होशियारा हैं। तीनों अपने हिस्से की 14 वर्षों की सजा काट चुके हैं।
इनमें दलसिंह और मनफूल हत्या के मामले में जबकि सईद अपहरण के केस में सजा काट रहे हैं। चार अप्रैल को कारागार में होनी वाली बैठक में डीएम, एसएसपी, प्रोबेशन अधिकारी और कारागार अधिकारी इन तीनों के साथ बैठक करेंगे। तीनों से बातचीत की जाएगी। रिहाई को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों को सभी कुछ ठीक लगेगा तो डीएम शासन को तीनों के नाम की रिपोर्ट भजेंगे, उसके बाद शासन से इनकी रिहाई के आदेश जारी होंगे।
क्या होगा रिहाई का आधार
मुजफ्फरनगर। कारागार में जिन तीन कैदियों की रिहाई को लेकर बैठक होनी है, उनके लिए रिहाई इतनी आसान भी नहीं है। कारागार में बैठक के बाद तीनों के बारे में थानों से जिला प्रोबेशन अधिकारी रिपोर्ट मांगेंगे। जेल से रिहा होने पर इनसे समाज को कोई खतरा तो नहीं, विरोधियों द्वारा इन पर कोई हमला तो नहीं होगा, घर की आर्थिक स्थिति, परिवारों की स्थिति, बुढ़ापे में इनकी देखभाल जैसे हालातों पर थानों से जांच रिपोर्ट ली जाएगी।
इसके बाद नहीं मिलेगा मौका
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार के तीनों कैदियों की रिहाई को लेकर यह उनके लिए पहला और अंतिम मौका होगा। नियमानुसार जो उम्रकैद का कैदी 14 वर्ष की सजा काट चुका होता है, उसके सही आचरण पर उसकी रिहाई के लिए विचार विमर्श किया जा सकता है। 20 वर्षों तक जेल में रहने के बाद कोई विचार विमर्श नहीं होता है।
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कारागार से नाम भेजे जाने के बाद भी कैदियों के परिजनों को लखनऊ तक पैरवी करनी होगी, तभी इनकी रिहाई संभव होगी। -राकेश सिंह, जेल अधीक्षक, जिला कारागार।