जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी के पंडाल में आयोजित बंग संध्या में डीएम राजीव शर्मा और मुख्य अतिथि सुधीर कुमार सक्सेना जमकर थिरके। पश्चिम बंगाल से आए कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। भाषा समझ नहीं आने से श्रोता कार्यक्रम में ठहर नहीं पाए। कार्यक्रम अफसरों और उनके परिवार के सदस्यों तक ही सिमट कर रह गया। आगे की वीआईपी गैलरी तक खाली पड़ी रही।
नुमाइश पंडाल में विकास प्राधिकरण के सहयोग से शुक्रवार रात बंग संध्या का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि राज्य लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। पश्चिम बंगाल से आए कलाकारों ने अपनी ही भाषा में प्रस्तुति दी।
आम आदमी की समझ में भाषा नहीं आने से पंडाल में अधिकतम लोग उठकर चले गए। केवल अफसर, उनके परिजन और एमडीए से जुडे़ लोग ही कार्यक्रम में मौजूद रहे। वीआईपी गैलरी तक खाली रही। पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भजन प्रस्तुत किए। संगीतमय नृत्य करते हुए कुछ कलाकार मंच से नीचे उतर आए और भक्ति के आनंद की अनुभूति करते हुए जमकर थिरके।
कलाकारों के साथ नृत्य करने के लिए डीएम राजीव शर्मा अपनी पत्नी सुधा शर्मा संग के खड़े हो गए। मुख्य अतिथि सुधीर कुमार सक्सेना भी नृत्य के लिए खडे़ हो गए, इन सबने कलाकारों के साथ जमकर नृत्य किया। मौके पर जो अधिकारी और कर्मचारी बैठे थे उन्होंने इस नृत्य का भरपूर आनंद लिया।
नुमाइश का सबसे महंगा कार्यक्रम
मुजफ्फरगनर। बंग संध्या नुमाइश का सबसे महंगा कार्यक्रम रहा। पंडाल में श्रोताओं ने भले ही सैकड़ों की संख्या पार न की हो, लेकिन पैसे के हिसाब से डीएम की पसंद का यह कार्यक्रम अब तक का सबसे महंगा था। इस कार्यक्रम पर छह लाख खर्च किया गया। यह सारी धनराशि प्रदर्शनी के खाते से दिया गया।
भारतीय संस्कृति विश्व शांति की प्रेरक
जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी में आचार्यकुल ने राष्ट्रीय एकता और विश्व शांति पर गोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रारंभ से ही विश्व शांति की पैरोकार रही है। नुमाइश पंडाल में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता खुदाई खिदमतगार के फैजल खान ने कहा कि महात्मा गांधी और विनोबा भावे ने राष्ट्रीय एकता और विश्व शांति का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि डीएम राजीव शर्मा ने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व में शांति का संदेश देने वाली संस्कृति है। संस्कृति चेतना के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य, डॉ रचना तैलंग, ब्रह्मा कुमारी जयंती बहन, पूनम विश्नोई, सतीश उपाध्याय, कस्तूर सिंह स्नेही,
डॉ पुष्पलता ने संपूर्ण धरती पर एकता, बंधुत्व, प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण स्थापित करने में गांधी और विनोबा के विचारों को अपनाने पर बल दिया। संचालन महबूब आलम ने किया। संयोजक होतीलाल शर्मा ने सभी वक्ताओं का आभार जताया। सत्यप्रकाश शर्मा, सुरेंद्र पाल, सीताराम, प्रेरणा मित्तल, सत्यपाल सिंह, ब्रजपाल सिंह, अनीता सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, चंद्रसैन शर्मा आदि रहे।