टिकट बंटवारे के बाद भाजपा में बगावत
मुजफ्फरनगर। भारतीय जनता पार्टी में जिला पंचायत के टिकट की घोषणा के बाद से ही बगावत की स्थिति बनी है। पार्टी संगठन में शामिल कई पदाधिकारी अधिकृत प्रत्याशी के सामने मैदान में आ गए हैं। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरेंद्र पाल तो पार्टी छोड़ बसपा में शामिल हो गए हैं और वार्ड दस से बसपा के प्रत्याशी भी घोषित हो गए हैं।
जिले में लंबे समय बाद भाजपा में बिखराव नजर आ रहा है। आरोप है कि कार्यकर्ताओं को विश्वास में ही नहीं लिया गया। कई वार्डों में तो भाजपा के कई-कई प्रत्याशी सामने आ गए हैं। टिकट वितरण में कई वार्डों पर संगठन सवालों के घेरे में है। शहर से सटे वार्ड दस में ही पार्टी के कई कार्यकर्ता एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने यहां श्रीभगवान शर्मा को टिकट दिया है। निवर्तमान सदस्य हरेंद्र शर्मा पार्टी से बगावत कर मैदान में हैं। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरेंद्र पाल ने तो भाजपा ही छोड़ दी है। वह वार्ड दस से ही बसपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में आ गए है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने चचेरे भाई सतेंद्र ने वार्ड 18 से ताल ठोक दी है। यहां भाजपा ने पहले प्रदीप कश्यप का नाम घोषित किया बाद में सहेंद्र कश्यप के नाम की घोषणा की थी। बालियान भी इस बात से नाराज है कि उनके गांव वाली सीट पर भी उन्हें प्राथमिकता नहीं दी गई। निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य नजर सिंह गुर्जर, बबलू राठी टिकट कटने के बाद भी मैदान में है।
वार्ड सात से भाजपा ने तरुण पाल को मैदान में उतारा है। यहां पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता उमेश धीमान भी मैदान में है। वार्ड 32 में भाजपा के एक पदाधिकारी ही अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में हैं। यही स्थिति अन्य वार्डों की है। अधिकतम वार्डों में भाजपा के बागी चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ बागी तो ऐसे हैं जो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी हाईकमान अब क्या निर्णय लेता है सभी की निगाहें इसी पर टिकी हैं।
मनाने में लगे हैं पार्टी के नेता: शुक्ला
भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला ने बताया कि अधिकतम वार्डों में बागी प्रत्याशी की समस्या है। पार्टी इसे गंभीरता से ले रही है। पार्टी हाईकमान ने जिले के बड़े नेताओं को ऐसे कार्यकर्ताओं से बातचीत कर समस्या को हल करने के लिए लगाया है। लगातार बातचीत चल रही है, जल्दी ही समाधान की उम्मीद है।