- बोले चौधरी नरेश टिकैत - पेराई सत्र शुरू हो गया है, अभी तक गन्ने का भाव घोषित नहीं
- गठवाला खाप के फुगाना गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में भाकियू की मासिक पंचायत
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संवाद न्यूज एजेंसी
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। पेराई सत्र और भुगतान शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक गन्ने का भाव घोषित नहीं किया गया। कहा कि 2024 में जिसे जहां वोट देनी है दे लेना, लेकिन संगठन को मजबूत बनाकर रखिए। भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह ज्यादा जम गए, इन्हें जमाने में हमारा भी सहयोग रहा, हम अब पछता रहे हैं। रामराज का सपना दिखाकर हमें भी लुभा लिया था, वर्तमान में किसान की हालत बुरी है।
गठवाला खाप के फुगाना गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में भाकियू की मासिक पंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि किसान के सामने बहुत गंभीर समस्याएं हैं। बिजली व गन्ने की समस्या किसानों को भारी पड़ रही है। भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सरकार तो फिर भी यही बनाएंगे, इनके पास हथकंडे हैं। आरोप लगाया कि इन्होंने बेइमानी सीख ली है, लेकिन भारत की एकता, अखंडता टूट जाएगी। इनका रवैया जिद्दी है। किसानों से कहा कि हम भाव के बिना भी काम चला लेंगे, लेकिन अगर कुछ खर्चा करने से भी यह संगठन बचता है तो बचा लेना। अब 18 से 28 के युवाओं के संभलने की बात है। किसान चारों तरफ से घिरता जा रहा है। किसानों को अपनी खेती पर भी ध्यान देना चाहिए।
सरकार की नजर आपकी जमीन पर : राकेश टिकैत
पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के सामने बहुत गंभीर समस्याएं हैं। गन्ना व बिजली की समस्या किसान को परेशान कर रही है। सरकार की नजर आपकी जमीन पर है। हाईवे पर व्यापारी जमीन खरीदते जा रहे हैं। आपकी जमीन चली गई तो सबकुछ चला जाएगा। शामली मिल के गन्ने के बकाया भुगतान की समस्या को लेकर उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र का किसान परेशान है। मिल चलनी चाहिए या क्षेत्र का गन्ना दूसरी चीनी मिलों को दिया जाए। गन्ने का हाल मुर्दे जैसा है। मुर्दे को घर में और गन्ने को खेत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अपने संगठन को मजबूत करें, गांव-गांव में कमेटी बनाएं। गांव की कमेटियां अपनी समस्याओं को उठाएं। ग्राम प्रधान पर यकीन न करें। ग्राम प्रधान सरकार के नुमाइंदे के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसान को फसलों के उचित दाम भी नहीं मिल रहे हैं। सरकार ने अभी तक गन्ना मूल्य भी घोषित नहीं किया है। उन्होंने भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताया।
मासिक पंचायत में गन्ना भुगतान का मुद्दा छाया रहा
गठवाला खाप के गांव फुगाना में आयोजित भाकियू की मासिक पंचायत में गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा छाया रहा है। हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रतनलाल ने बताया कि हरियाणा और यूपी में सरकार ने अलग-अलग रेट रखे हैं। यह सरकार किसान विरोधी है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री को किसान विरोधी बताया। गठवाला खाप के थांबेदार चौधरी श्याम सिंह ने कहा कि जिंदा रहना है तो अपने संगठन को मजबूत करो। यह जालिम सरकार किसानों को पीसकर रख देगी। विनोद खेड़ा ने कहा कि भुगतान न होने से किसान की दुर्दशा हो गई है। भाजपा को वोट देने का बहुत बड़ा पछतावा है। मोदीनगर से आए महेंद्र सिंह ने कहा कि मन की बात कहने वाले प्रधानमंत्री बेहद झूठ बोलते हैं। इतना झूठ बोलने वाला इंसान उन्होंने जीवन में नहीं देखा। मैनपाल चौहान ने कहा कि हमें संगठित होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए। किसान के सामने फसलों के दाम तथा गन्ने के बकाया भुगतान की समस्या सबसे गंभीर है।
पंचायत में ये रहे मौजूद
पंचायत में चौधरी ओमपाल सिंह, थांबेदार श्याम सिंह बहावड़ी, संजीव पंवार, भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा, बतीसा खाप के चौधरी शौकिंदर, कविता चौधरी, नरेश चौधरी, नरेंद्र मलिक, मैनपाल चौहान, योगेंद्र शामली, अब्बास, सुरेश कुमार, अमित मलिक, सुरेंद्र सिंह, राजकुमार करनावल, देवेंद्र सिंह, सतवीर भैंसवाल, भरतवीर, वीरसेन, विकास शर्मा, विदेश मौतला, संजय दौरालिया व इमरान ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता ठाकुर जगत सिंह और संचालन जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने किया।
शामली की कार्यकारिणी बहाल की
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने पंचायत में शामली जिले की कार्यकारिणी के बहाल करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मनमुटाव दूर कर, एकता और अनुशासन के साथ कार्य करें। किसान और कार्यकर्ता चाबी का काम करें। चाबी से ही ताला खुलता है। किसी संगठन की बुराई नहीं करनी चाहिए, जो चले गए, उनके विचार भी हमारे साथ हैं।
गुर्जर समाज से सीख लेनी चाहिए
भाकियू अध्यक्ष ने कहा कि शादी और रस्म तेरहवीं में बेहद खर्च किए जा रहे हैं, जिससे किसानों के सामने परेशानी है। शादी की चिट्ठी देकर फिर फोन भी करते हैं। अब शादी मैरिज होम में हो रही है। किसान व मजदूर खर्चों में घिरा है। गुर्जर समाज के यहां शोक सभा में कोई पानी तक नहीं पीता। जबकि अन्य लोग बेहद खर्चा कर रहे हैं। अन्य लोगों को भी गुर्जर समाज से सीख लेनी चाहिए।