डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत होने वाले 26 गांवों की जमीन पर खडे़ पेड़ों की कीमत कम आंके जाने पर भाकियू ने डीएफओ ऑफिस पर जमकर हंगामा किया। अधिकारियों के कार्यालयों में घुसकर उनकी कुर्सियां पलट दी। अधिकारियों को उनके कार्यालयों में ही बंधक बना दिया। बाद में डीएफओ को घंटों अपने बीच में बैठाया और आश्वासन के बाद ही हंगामा समाप्त हुआ।
भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान डीएफओ ऑफिस पहुंचे। मुख्य गेट पर किसानों ने अपना ट्रैक्टर खड़ा कर अधिकारियों की गाड़ियों का रास्ता बंद कर दिया। डीएफओ ऑफिस में पहुंचकर किसानों ने भारी हंगामा किया। किसानों ने अधिकारियों पर रेलवे कॉरिडोर बना रही कंपनी से मिलीभगत का आरोप लगाया। किसानों ने प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी दफ्तर की कुर्सियां पलट दीं। दफ्तर में कूड़ा डाल दिया।
वहीं उप प्रभागीय वन अधिकारी के दफ्तर में घुसकर कुर्सियां पलटते हुए कर्मचारियों को बाहर खदेड़ दिया। डीएफओ के स्टाफ के दफ्तर में भी तोड़फोड़ कर कुर्सियां पलट दी। किसानों के हंगामे से दफ्तर में अफरा-तफरी मच गई। किसान कार्यवाहक डीएफओ संजीव कुमार को दफ्तर से बाहर खींच लाए और उसे अपने बीच बैठा लिया। किसानों का आरोप था कि 26 गांवों की जमीन रेलवे कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत की जा रही है।
वन विभाग ने किसानों के खेतों में दस साल से खड़े पापुलर की कीमत 107 रुपये और शीशम के पेड़ की कीमत 500 रुपये आंकी गई। किसानों ने बीच डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि पहले पुराने रेट गए थे, अब नए रेट आ गए हैं। पापुलर के दस साल पुराने पेड़ के अब 2900 रुपये और शीशम के पेड़ के 86 हजार रुपये दिलाए जाएंगे। किसानों को अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वह नया प्रस्ताव बनाकर भेज रहे हैं। राजू अहलावत ने बताया कि किसानों की मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो किसान दोबारा आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
गांवों की जमीन हुई अधिग्रहीत
रेलवे कॉरिडोर के लिए टिटोडा, टबीटा, भायंगी, खतौली, भैंसी, शेरपुर, जहांगीरपुर, मढ़करीमपुर, खानपुर, इस्लामाबाद, बुआडा, नरा, बेगराजपुर, जडौदा, सीमली, मीरापुर, पीनना, सलेमपुर, लकड़संधा, कल्लरपुर, कछौली, कसियारा, जटनंगला, बधाईकलां, आखलौर, मुझेड़ा आदि गांवों की जमीन अधिग्रहीत की जा रही है।