मुजफ्फरनगर। काली और हिंडन नदी के दूषित जल की देहरादून की लैब में होगी। अमेरिका की संस्था और नीर फाउंडेशन ने गांवों से पानी कई सैंपलों को सीलबंद कर लैब भिजवाया है। इसके अलावा पूरी रिपोर्ट को भारत सरकार के साथ एनजीटी के समक्ष रखा जाएगा। जिन गांवों में हालात अधिक खराब है, उन गांवों में किए गए कार्यों को भी ब्योरा बनाया जा रहा है।
काली नदी के किनारे बसे करीब 70 गांवों में ग्रामीणों की जिंदगी दूषित जल के कारण नासूर बन गई है। नलों से निकलने वाला चंद मिनटों बाद ही पीला पड़ रहा है। इसके प्रयोग से चर्म रोग के साथ कैंसर होने का खतरा अधिक है। केमिकल युक्त पानी के कारण पशुओं में भी बीमारी बढ़ने लगी है। अमेरिका की वॉटर कलेक्टिव संस्था ने काली, हिंडन नदी के गांवों में कैंप कर प्रदूषण की पूरी रिपोर्ट बनाई है।
कई वर्ष से दोनों नदियों में गंदे पानी का दंश झेल रहे ग्रामीणों को राहत दिलाने में सरकारी मशीनरी विफल है। वर्ष 2011 में यहां के पानी की जांच की गई थी, तब भयावह स्थिति सामने आई थी। ग्रामीणों के खेत-खलियानों के साथ फल-सब्जी तक दूषित मिले थे।
अब फिर से नदियों के साथ गांवों के नलों से पानी के सैंपल एकत्र किए गए हैं। जिन्हें अमेरिकी विशेषज्ञ अपने साथ ले गए हैं। हालांकि नीर फाउंडेशन ने बोतलबंद सैंपलों को देहरादून की पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट लैब भिजवाया है। लैब में इसकी तस्दीक की जाएगी कि पानी में किस स्तर के केमिकल, पेस्टीसाइड, लैड, आयरन के अलावा दूषित कण है। यह पानी कितनी हीटिंग पर साफ होगा या नहीं, इसकी भी गहनता से जांच होगी। लैब सैंपलों की रिपोर्ट पर बताएगी कि पानी के प्रयोग से मनुष्य, पशुओं और खेतों पर कितना असर पड़ेगा। उसके बाद रिपोर्ट को सरकार के अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को भेजा जाएगा। नीर फाउंडेशन के निर्देशक रमनकांत त्यागी ने बताया कि गांवों से एकत्र किए गए सैंपलों को देहरादून की लैब में भेजा गया है। यहां से रिपोर्ट आएगी। रिपोर्ट को मंडलायुक्त, एनजीटी और भारत सरकार को सौंपा जाएगा।