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दारुल उलूम की आमला की बैठक में छोटी कक्षाओं के प्रवेश का निर्णय

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देवबंद(सहारनपुर)। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में निर्माण कार्यों, वित्तीय और शैक्षिक मामलों पर सदस्यों ने विचार विमर्श किया। हालांकि कोरोना काल के चलते अभी शिक्षण सत्र आरंभ करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
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बुधवार को दारुल उलूम के मेहमानखाने में मजलिस-ए-आमला की बैठक दो चरणों में संपन्न हुई। इसमें मजलिस-ए-शूरा के निर्णयों की समीक्षा की गई साथ ही संस्था से संबंधित विभिन्न कार्यों को लेकर विचार विमर्श किया गया। एक जुलाई से दाखिला प्रक्रिया आरंभ करने का निर्णय संस्था के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी की अध्यक्षता में बनी शिक्षा समिति को सौंपा गया। मौलाना अरशद मदनी को शिक्षा समिति का सदस्य भी नियुक्त किया गया। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने का लिया गया। वहीं, सूत्र बताते हैं कि अगर कोरोना के चलते शिक्षण संस्थाओं में शिक्षण कार्य आरंभ नहीं किया जाता तो दारुल उलूम भी वक्फ दारुल उलूम की तर्ज पर छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने पर विचार कर सकता है। हालांकि अभी इस निर्णय पर मोहर नहीं लगी है। बैठक में अरबी दौम (दूसरी कक्षा) से अरबी चाहरुम (कक्षा चार) तक के सभी दाखिलों के लिए घोषणा की गई। जिसके तहत उक्त कक्षाओं के छात्रों को एक जुलाई तक दारुल उलूम पहुंचने को निर्देशित किया गया है। जिससे वह प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकें और शासन के आदेश मिलते ही शैक्षिक सत्र आरंभ किया जा सके। संस्था के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि इन कक्षाओं के उन्हीं छात्रों को संस्था में प्रवेश की अनुमति होगी। जिनके ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए गए हैं।
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