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जेल के बंदी की मेरठ में उपचार के दौरान मौत      

Thu, 01 Dec 2016 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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जिला कारागर में हार्ट की बीमारी से बंदी की मेरठ में उपचार के दौरान मौत हो गई। जेल अधिकारियों ने परिजनों को सूचना कर दी। पुलिस ने मेरठ में ही शव का पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया। शव परिजनों को सौंप दिया गया है। जेल में बीमारी से बंदियों की मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। खतौली निवासी मोनी (25) पुत्र ज्योति प्रसाद हत्या और गैंगस्टर के मुकदमों में वर्ष-2014 में कारागार में आया था। वह हार्ट की बीमारी से पीड़ित था।
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कई माह से उसका दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में उपचार चल रहा था। सोमवार को उसे चिकित्सकों को दिखवाने के लिए दिल्ली भेजा गया था, जहां से वह मंगलवार दिन में वापस आया था। जेल में आने के बाद फिर से उसकी तबियत बिगड़ गई। अधिकारियों ने पहले जेल के अस्पताल मेें फिर सुधार नहीं होने पर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। गंभीर हालत के चलते डॉक्टरों ने मोनी को मेरठ के लिए रेफर कर दिया।

मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। रात में ही जेल के अफसरों ने उसके परिजनों को सूचना की। सुबह परिजन शव के पास पहुंच गए। पुलिस ने मेरठ में ही पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम कराया। देर शाम मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया।       
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एक माह में पांच मौतों से बीमार बंदियों में दहशत      
एक माह में पांच बंदियों की मौतों से जेल के बीमार बंदियों में दहशत पसरी है। जेल में चिकित्सकों की कमी के चलते दर्जनों बंदी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लगातार मौतों ने जेल अधिकारियों के माथे पर चिंता के बल ला दिए हैं।       

नवंबर माह जेल के बीमार और वृद्व बंदियों पर कहर बनकर टूट रहा है। परिजनों से दूर और गंभीर बीमारियों से पीड़ित बंदी बहुत परेशान हैं। लगातार पांच बीमार बंदी मौत का शिकार हो चुके हैं। करीब ढाई हजार बंदियों के उपचार का जिम्मा मात्र एक चिकित्सक पर है। सैकड़ों बंदी किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है।

एक डॉक्टर इतने बंदियों का उपचार करने में सक्षम नहीं है। जेल अधीक्षक द्वारा कई बार शासन को खत लिखने के बाद भी जेल में डॉक्टर नहीं भेजा जा रहा है। अधिकारियों की माने तो कम से कम तीन चिकित्सक कारागार में हमेशा रहने चाहिए। हार्ट, सांस, दमा, बुखार, खांसी, टीबी आदि बीमारियों से बंदी जूझ रहे हैं। लगातार मौतों से बंदियों में दहशत व्याप्त है तो वहीं दूसरी ओर जेल अधिकारियों के माथे पर चिंता के बल हैं।
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