कोरोना में दो मासूम बेटियों के सिर से उठ गया पिता साया
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण ने शहर के निकटवर्ती गांव लकड़संधा की अर्पणा के परिवार की भी खुशियां छीन ली हैं। कोरोना संक्रमण से पति की मौत के बाद परिवार पर गमों का पहाड़ टूट गया है। दो मासूम बेटियों को यह भी पता नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया सदा के लिए उठ गया है। आर्थिक संकट से जूझ रही अर्पणा पर मासूम बेटियों के साथ बीमार ससुर की देखरेख की भी जिम्मेदारी आ गई है।
शहर से सटे चरथावल मार्ग पर स्थित लकड़संधा गांव निवासी आशीष पांचाल (31) तमिलनाडु में एक प्राईवेट निर्माण कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत था। गांव में पिता गुलाब सिंह बीमार रहते हैं, वह करीब बीस साल से हृदय रोगी हैं। जिस कारण आशीष की पत्नी अर्पणा अपनी दोनों बेटियों नित्या (5) और आर्या (2) के साथ गांव में ही रहती है। अच्छी नौकरी होने से सब अच्छा चल रहा था। मगर बीते दो सप्ताह में ही परिवार की खुशियों को कोरोना संक्रमण ने छीन लिया। कोरोना काल में कुछ छूट मिलने पर आशीष 13 मई को ही तमिलनाडु से गांव में आया था। 14 मई को उसे गले में परेशानी हुई। दो दिन बाद बुखार आ गया। डॉक्टरों को दिखाया तथा दवाई ली। साथ ही कोविड जांच कराई वह नेगेटिव आई।
बावजूद इसके आशीष की तबीयत में सुधार नहीं हो सका। परेशान परिजन उसे लेकर डॉक्टर के यहां भटकते रहे, मगर आराम नहीं मिला। 24 मई को फिर से कोविड की जांच कराई तो पॉजिटिव आई। ऑक्सीजन लेवल लगातार कम होने पर उसे डॉक्टरों के यहां ले जाया गया, मगर कहीं भी बेड नहीं मिला। परिजनों ने घर में ही छह हजार का ऑक्सीजन सिलिंडर लाकर उसे ऑक्सीजन दी, मगर तबीयत बिगड़ती गई। 26 मई को परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए, जहां पर उपचार के दौरान उसने तम तोड़ दिया। पति की मौत के बाद अर्पणा पर गमों पर पहाड़ टूट गया है। दोनों मासूम बेटियों के साथ बीमार ससुर की देखरेख की जिम्मेदारी भी उस पर आ गई है।