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जिले के 16 गांवों का डेटा होगा जीआईएस बेस

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जिले के 16 गांवों का डेटा होगा जीआईएस बेस
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मुजफ्फरनगर। जिले में जमीनों के विवादों को रोकने का काम अब प्रशासन का ‘धरा एप’ करेगा। जनपद के 16 गांवों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल करते हुए इन गांवों की समस्त जमीनों का रिकार्ड जीआईएस बेस हो रहा है। अब जमीन क्रय करने वाले के साथ धोखाधड़ी की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। रजिस्ट्री को लेकर भी अब कोई स्टांप कर में हेराफेरी नहीं कर पाएगा। गाटा नंबर क्लिक करते ही जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
नेशनल हाइवे और शहर से सटे जिले के 16 गांवों का डेटा अब जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) बेस होगा। गूगल पर इन गांवों के प्रत्येक गाटे की जानकारी घर बैठे ली जा सकेगी। जिला प्रशासन ने लखनऊ की संस्था रिमोट सेल्फिंग एंड एप्लीकेशन सेंटर से इसके लिए करार किया है। धरा एप के माध्यम से यह संस्था सर्वप्रथम 16 गांवों की जमीनों का समस्त डेटा जीआईएस बेस करेगी।
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जमीन खरीदने से पहले क्रेता जमीन की वास्तविक स्थिति इस एप के माध्यम से देख सकेगा। जो जमीन वह खरीद रहा है, उसका संबंध सार्वजनिक भूमि, विवादित भूमि से तो नहीं है। गाटा नंबर क्लिक करते ही सब कुछ उसके सामने आ जाएगा। जमीन का वाद न्यायालय में चल रहा है तो स्पष्ट हो जाएगा। हाइवे के 200 मीटर तक की समस्त जमीन का डाटा अलग से फीड रहेगा। स्टांप कर चोरी की संभावनाएं खत्म हो जाएगी। उप निबंधक जमीन के खसरा नंबर से ही उसके सर्किल रेट और वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लेंगे। यह भी पता चल जाएगा कि कौन सी जमीन एमडीए के मास्टर प्लान में है और कौन सी ग्रीन बेल्ट में है। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि 16 गांवों के चयन का कार्य हो रहा है, जल्द ही संस्था अपना काम शुरू कर देगी। (संवाद)
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धोखाधड़ी, कर चोरी रुकेगी
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि जनपद में सबसे ज्यादा अपराध जमीनों को लेकर है। 16 गांवों में रिकार्ड फीड करने की पूरी प्रक्रिया होने के बाद पूरे जिले के गांवों में अभियान चलेगा। जनपद में जमीनों को लेकर धोखाधड़ी और कर चोरी पूरी तरह रुक जाएगी।
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