हत्यारों के निशाने पर मृतक किसान का बेटा भाकियू नेता योगेश सिवाच था। वह वारदात के कुछ समय पहले ही वहां से उठकर घर में चला गया था। योगेश हत्या के एक मामले में मुख्य गवाह है। एक दिन पहले ही फोन पर उसे गवाही नहीं देने की धमकी मिली थी। शुक्रवार को कोर्ट में उसकी गवाही होनी थी।
भाकियू नेता योगेश का मौसा राजेंद्र सिंह भी गड़वाड़ा का ही रहने वाला था। जिसकी करीब चार वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। राजेंद्र के केवल एक बेटी रेनू है, जो जानसठ के गांव सादपुर में रहती है। राजेंद्र भी किसान था, उसने अपने जीते जी अपनी 18 बीघा जमीन की वसीयत अपनी बेटी रेनू को न करके अपने भतीजे राजदीप पुत्र विरेंद्र गड़वाड़ा के नाम कर दी थी। यह बात सभी रिश्तेदारों को बहुत अखरी।
इसका रेनू के मौसा नंगली महासिंह निवासी किसान नेता रामकुमार मुखिया ने भी विरोध किया था। विरोध करने पर रामकुमार की दो वर्ष पहले नंगली महासिंह गांव के पास उस समय हत्या कर दी गई थी, जब यह गांव से जानसठ आ रहा था। रामकुमार की हत्या के आरोप में राजेंद्र का भाई विरेंद्र, भतीजा राजदीप, रूबल और रामवीर जेल गए थे। बाप-बेटे विरेंद्र और राजदीप की जमानत हो गई थी, जबकि रूबल और रामबीर जेल में ही बंद हैं।
रेनू का मोसेरा भाई होने के नाते योगेश पुत्र जगमेहर इस हत्याकांड में मुख्य गवाह बना था। योगेश ने बताया कि बुधवार को जेल में बंद रूबल और रामवीर की ओर से उसे धमकी दी गई थी कि शुक्रवार को गवाही देने नहीं जाना। योगेश ने पीछे हटने से मना कर दिया था। बृहस्पतिवार रात योगेश के घर पर हमला हो गया।
जिस समय घटना हुई, उससे कुछ समय पहले ही योगेश भी घर के बाहर ही बैठा था। वह किसी कार्य के लिए मकान के अंदर चला गया था। इसी दौरान हमलावरों ने वहां आकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। उनका टारगेट भाकियू नेता योगेश शिवाच ही था, मगर फायरिंग में उसके पिता जगमेहर सिंह मारे गए। एसपी देेहात विनीत भटनागर ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच-पड़ताल कर नामजद हत्यारोपियों की तलाश में जुटी है।