एडीजे एकादश ने चार साल पहले नूनाखेडा गांव में हुई मोहित की हत्या के मामले में शुक्रवार को निर्णय सुनाया। न्यायधीश ने तीन हत्यारों को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को 30-30 हजार रुपयों के जुर्माना की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना तितावी पर नूनाखेडा निवासी मोजिन्द्र पुत्र विक्रम सिंह ने एक मार्च 2012 को मुकदमा हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के रोजा मोजिंद्र उसका भाई मोहित व भाभी सुनीता पत्नी कुंवरपाल, प्रेम पुत्र मोहर सिंह, सुरेश पुत्र सुक्खन, सुनील पुत्र रतन सिंह के साथ दुकान पर जा रहे थे। रास्ते में गांव के ही हरिओम उर्फ बुन्टा, श्रीओम पुत्रगण सितारा व रुपेश खड़े मिले।
भाई मोहित ने श्रीओम व हरि ओम से अपने उधार के 50 हजार रुपये मांग लिए। इस बात से नाराज होकर श्रीओम व हरीओम व रूपेश ने तमंचों से गोली मार दी । जिससे मोहित की मौके ही मौत हो गई। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार एकादश की अदालत एफटीसी संख्या- 4 में हुई ।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजू महले ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए 6 गवाह पेश करते हुए साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षो की दलील और सबूतों के साथ गवाहों के बयानात पर गौर करते हुए अभियुक्त हरिओम उर्फ बुन्टा, श्रीओम पुत्रगण सितारा एवं रुपेश को मोहित की हत्या करने का दोषी पाया और धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक पर 30 हजार रूपयो का जुर्माना की सजा सुनाई है।