मानवाधिकार आयोग ने अपनी जांच में करीब 11 साल पहले वर्ष 2007 में रतनपुरी में हुए अमजद एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। आयोग की रिपोर्ट पर शासन ने पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के एडीजीपी को पत्र लिखकर पीड़ित के परिजनों को पांच लाख रुपये की अंतरिम सहायता दिए जाने तथा सहायता की राशि दोषी पुलिसकर्मियों पर वसूली का दंड अधिरोपित करके उनसे वसूले जाने के आदेश दिए हैं।
साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को भी कहा है। शासन के अनुपालन में डीएम की ओर से सोमवार को मृतक अमजद की मां अख्तरी को पांच लाख रुपये की अंतरिम सहायता का चेक सौंप दिया गया है। मानवाधिकार आयोग की इस कार्रवाई में मुठभेड़ में शामिल रहे पुलिस कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
रतनपुरी, भौराकलां पुलिस और एंटी एक्सटार्सन सेल ने तीन फरवरी 2007 को रतनपुरी थाना क्षेत्र में रामपुर चौराहे पर हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी युवक अमजद पुत्र खालिद पुलिस मुठभेड़ में मारा था। आरोप था कि वह भौराकलंा क्षेत्र से बाइक लूट कर भाग रहा था।
इस मामले में अमजद की मां अख्तरी ने दो फरवरी 2007 को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स किया गया था, जिसमें उसने रतनपुरी पुलिस द्वारा उसके पुत्र अमजद को एक फरवरी 2007 की रात्रि में घर से उठा कर ले जाना बताया था। साथ ही उसने प्रधानमंत्री को भी पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगाई थी।
बाद में मानवाधिकार आयोग द्वारा इस मामले की जांच की गई। आयोग ने 20 जून 2017 को जांच रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी थी, जिसमें मानवाधिकारों के उल्लंघन का होना पाया गया था। जांच में एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया।
मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर शासन के अनुसचिव पद्माकर शुक्ला ने पुलिस हेड क्वार्टर के अपर पुलिस महानिदेशक को 6 फरवरी 2018 को पत्र लिखकर कहा कि इस प्रकरण में मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की धनराशि अंतरिम सहायता के रूप में प्रदान की जाए।
धनराशि की प्रतिपूर्ति के लिए प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करके प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों पर वसूली का दंड अधिरोपित करके नियमानुसार वसूली कर राजकोष में जमा कराई जाए। साथ ही कार्रवाई से शासन को भी अवगत कराया जाए। इस आदेश के पालन में डीएम की ओर से सोमवार को मृतक अमजद की मां अख्तरी को अंतरिम राहत का पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट सौंप दिया गया।
दोषी पाए गए पुलिस कर्मी
मुजफ्फरनगर। मानवाधिकार आयोग की जांच में अमजद का फर्जी एनकाउंटर करने वालों में 11 पुलिस कर्मी शामिल थे। 3 फरवरी 2007 में रतनपुरी के रामपुरी चौराहे पर हुई अमजद मुठभेड़ में तत्कालीन निरीक्षक एंटी एक्सटॉर्सन सेल इकबालुज्जमां खान, हेड कांस्टेबल मीरहसन, कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल मीर हसन, तत्कालीन एसओ रतनपुरी डॉ प्रवीण कुमार, कांस्टेबल मैयादीन सिंह, कांस्टेबल ब्रजपाल, कांस्टेबल सोहनवीर, चालक कांस्टेबल जसबीर सिंह, तत्कालीन एसओ भौराकलां सुधीर पाल धामा, एचसीपी अमीर सिंह शामिल रहे थे। इस मुठभेड़ का मुकदमा डॉ प्रवीण कुमार द्वारा रतनपुरी थाने पर दर्ज कराया गया था।
डॉ प्रवीण कुमार की गत वर्ष मृत्यु हो चुकी है। निरीक्षक इकबालुज्जमां खान सेवानिवृत्त हो चुके है। मीर हसन एसआई है, जो सहारनपुर जिले में तैनात है। अशोक कुमार को छोड़ कर बाकी पुलिस कर्मी अन्य जिलों में तैनात है।
हत्या की इस्तगासा कोर्ट में लंबित
मुजफ्फरनगर। अमजद एनकाउंटर प्रकरण में मृतक की अख्तरी की ओर से सीजेएम कोर्ट में हत्या की इस्तगासा डाली हुई है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता काजी मोहम्मद नईम ने सभी 13 पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलाने के लिए तलबी का दावा किया हुआ है, जिसमें आरोपियों की तलबी बयान के लिए 19 अप्रैल की तिथि नियत है। अधिवक्ता नईम ने बताया कि इस मामले में उनके द्वारा नौ गवाहों के बयान कराए जा चुके हैं।