जिला एवं सत्र न्यायालय की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ग्रामीण के अपहरण के मामले में अपहरणकर्ता को चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माने की रकम में से 15 हजार रुपये अपहृत को देने का आदेश दिया है। 17 साल बाद अपहरण के मुकदमे में कोर्ट का निर्णय आया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार ग्राम कासोपुर निवासी प्रवीण कुमार ने छपार थाने पर 29 सितंबर 1999 को अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें उसने बताया था कि उसका पिता करतार सिंह और पीरू सिंह 28 सितंबर को लगभग 12 बजे स्कूल बंद कर छपार आ रहे थे। रास्ते में ग्राम खुड्डा के जंगल में दोनों का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया है।
पुलिस ने विवेचना के बाद जयद्रथ पुत्र भोपाल सिंह और अरशद पुत्र इदरीश निवासी कासोपुर के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार एकादश की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या 4 में हुई, जिसमें सहायक शासकीय अधिवक्ता राजू महले ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए कोर्ट में 6 गवाह पेश करते हुए अपनी दलील और सुबूत दिए।
विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील और सुबूतों पर गौर करते हुए अभियुक्त अरशद को धारा 364 के तहत दोषी मानते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ 25 हजार रुपया का जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि में से 15 हजार रुपये अपहृत करतार सिंह को देने का आदेश भी दिया है। दूसरे अभियुक्त जयद्रथ की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी, इसलिए उसका नाम मुकदमे की सुनवाई से अलग कर दिया गया था।