आठ माह पहले एक ऐसी महिला के साथ दरिंदगी हुई, जिसे न दुनियादारी की समझ है और न ही खुद की सुध। अक्सर शहर की सड़कों पर घूमती दिखने वाली मंदबुद्धि महिला गर्भवती है और जल्द ही वह बच्चे को जन्म देगी। बच्चे का पिता कौन है, यह कोई नहीं जानता। अच्छी बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी लोग अभी से अजन्मे बच्चे को गोद लेना चाहते हैं। फिलहाल उसके रोटी-कपड़े और देखभाल की जिम्मेदारी मोहल्ले के लोग निभा रहे हैं।
शहर के रामपुरम इलाके में करीब 35 साल की इस महिला को आसपास के लोगों ने एक नाम दे रखा है। यह महिला कौन है, कहां से आई है, किसी को नहीं मालूम। पूछने पर वह जो कुछ बताती है, समझ नहीं आता। लगभग एक साल पहले वह अचानक शहर की सड़कों पर दिखाई दी। जिसने जो दे दिया, खा लिया। सड़क किनारे सो जाना, दिनभर घूमना-फिरना, यही उसकी जिंदगी थी। अचानक महिला के शरीर में परिवर्तन दिखने लगा। महिला के गर्भवती होने के बाद यह समझने में देर नहीं लगी कि वह दरिंदगी का शिकार हुई है। लाचार और असहाय महिला को रामपुरम के बाशिंदों ने आसरा दिया।
होम्योपैथ के धर्मार्थ औषधालय में उसे रखा गया है। वहीं पर मोहल्ले के लोग खाना, कपड़े और जरूरत की चीजें मुहैय्या करा रहे हैं। महिला की हिफाजत के लिए रात को उसे आरटीओ कार्यालय के चौकीदारों की सुरक्षा में रखा जाता है। हालात को देखते हुए पीड़िता की देखभाल के लिए लोगों ने चंदा एकत्र कर एक महिला को केयरटेकर की जिम्मेदारी सौंपी है। जल्द ही वह बच्चे को जन्म देगी। गर्भवती महिला का मामला पुलिस के संज्ञान में भी लाया गया था। पुलिस वाले आए और पल्ला झाड़कर चले गए। अमर उजाला ने पूरे मामले की तहकीकात की। महिला के साथ दुष्कर्म की वारदात कहां हुई, गुनहगार कौन है, बच्चे का भविष्य क्या होगा, ऐसे ही अनगिनत सवालों का किसी के पास कोई जवाब नहीं मिला।
पूछने पर पीड़िता कोई भी ऐसा शब्द या उत्तर नहीं दे पाती है, जिससे उसके घर और पते की पहचान हो सके। रेप की घटना के बारे में भी वह कुछ नहीं बता पा रही है। वह थोड़ा बहुत जो भी बोलती है उससे लगता है कि वह वेस्ट यूपी से ही ताल्लुक रखती है। कभी मेरठ का जिक्र करती है तो कभी दूसरे शहर के हलवाई के पास घर होने का संकेत देती है। विडंबना यह है कि जिसे खुद की सुध नहीं, वो कैसे नन्हें बच्चे का बोझ संभालेगी। महिला के दाएं हाथ पर ओम गुदा है। सुकून केवल इस बात का है कि महिला के अजन्मे बच्चे को हासिल करने के लिए कई निसंतान दंपतियों की फेहरिस्त है।
शहर का एक मुस्लिम परिवार डिलीवरी के बाद उसके बच्चे को गोद लेने का इच्छुक है। इसके अलावा कई और लोग भी बच्चे को पाने की चाहत रखते हैं। गोद लेने वालों के लिए यह कोई सवाल नहीं है कि बच्चा किस धर्म का है, अथवा लड़का है या लड़की। जो भी महिला को देखता है, उसे उसकी मौजूदा हालत पर दया भी आती है और गुनहगारों के खिलाफ गुस्सा भी। आखिर मंदबुद्धि महिला को किसने यह दरिंदगी सहने के लिए मजबूर किया है, लेकिन पेट में पल रहे बच्चे के प्रति ममत्व पिंकी के हाव-भाव से साफ झलकता है। पिंकी और उसके बच्चे का भविष्य क्या होगा, कोई नहीं जानता।
रामपुरम में मिला महिला को आसरा
जिस समाज में उसे दर्द मिला अब वही उसके लिए दवा बन गया है। महिला के मामले में रामपुरम के लोगों ने एकसाथ उसकी मदद को हाथ बढ़ाए। उसे सुरक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीने के लायक ताकत भी दी। ड्राइक्लीनर जितेंद्र, सुशील हलवाई, अनुज गोयल, विपिन, महताब आदि ने मिलकर चंदा इकट्ठा कर गर्भवती का जिम्मा उठाया है। उसे घर का बना खाना दिया जाता है। इनका कहना है कि महिला कंपनी बाग के आसपास घूमती थी, चार-पांच माह पहले वह रामपुरम आई। उसकी हालत को देखकर सबको तरस आया और मिलकर मदद करने की ठानी।
सरकारी अस्पताल में होगी डिलीवरी
सीएमओ कार्यालय में जिला स्वास्थ्य प्रचार अधिकारी डॉ गीतांजलि वर्मा ने पीड़िता की स्वास्थ्य रक्षा के लिए एक एएनएम की ड्यूटी लगाई है। वर्मा ने बताया कि पीड़ित महिला को डिलीवरी से पूर्व जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया जाएगा, ताकि मां और बच्चे की हिफाजत की जा सके।
क्या कहता है कानून
मंदबुद्धि पिंकी की मजबूरी का गुनहगारों ने तो फायदा उठाया ही, साथ ही कानून ने भी अपना फर्ज अदा नहीं किया। पुलिस को इत्तला के बाद पिंकी का मेडिकल टेस्ट होना चाहिए था और गुनहगारों की तलाश भी की जानी चाहिए थी। पिंकी को साथ लेकर घटनास्थल की छानबीन की जाती तो शायद कुछ क्लू सामने आते। मगर पुलिस ने मोहल्ले के लोगों को यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इसमें हम क्या कर सकते हैं।