संजीव हत्याकांड में पुलिस ने शुक्रवार को पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक जालसाजी से भाइयों की सास की जमीन हड़पने के मामले में आरोपी संजीव फैसले की तरफ बढ़ रहा था। इसी वजह से इस केस में अन्य आरोपी उसके रिश्तेदारों ने मिलकर हत्या कर दी।
मृतक के परिजनों ने बताया कि गांव शेरनगर निवासी ओमकारी की तीन पुत्रियों में दो की शादी बेहड़ा थ्रू निवासी संजीव उर्फ संजू के दो सगे भाइयों राधे और पाला के साथ हुई थी और तीसरी बहन गांव रसूलपुर थाना शाहपुर में ब्याही थी। ओमकारी के नाम पर हाईवे स्थित जानसठ चौराहे के करीब 22 बीघा जमीन थी। जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में हैं।
पुलिस के अनुसार करीब दो वर्ष पहले संजीव, उसका बहनोई कोकिंद्र निवासी भोकरहेड़ी और तेजलहेड़ा निवासी साले रविंद्र के पुत्र धर्मेंद्र और साढू बिनोद ने मिलकर ओमकारी की जमीन हड़पने की योजना बनाई थी। अलमासपुर निवासी महिला कमलेश को फर्जी कागजातों में ओमकारी दर्शाया। जालसाजी के जरिए ओमकारी की जमीन की पावर ऑफ अटार्नी हरियाणा से धर्मेंद्र के नाम कराकर दाखिल खारिज भी करा लिया था।
इसके बाद दूसरे लोगों को जमीन बेचकर धन ले लिया था। जमीन खरीदने वाले कब्जा लेने पहुंचे तो ओमकारी के सामने पूरी जालसाजी का भेद खुला। इसके बाद ओमकारी ने डीएम से मामले की शिकायत की थी। जांच होने पर ओमकारी की तरफ से तहरीर पर महिला कमलेश, कोकिंद्र, धर्मेंद्र और संजीव के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।
जिसके बाद सभी आरोपी जेल गए थे। कुछ दिन पहले वह जमानत पर छूटकर आए थे। इसके बाद संजीव को उसके भाइयों ने समझाया। इसके बाद संजीव की तरफ से केस में फैसले की हामी भर दी गई थी। यह बात फर्जीवाड़े के केस में अन्य आरोपियों को नागवार गुजरी। सारा खेल बिगड़ता हुआ देखकर संजीव को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। इसमें विनोद सूत्रधार रहा।
बृहस्पतिवार को साढू विनोद संजीव को साथ लेकर आया था। कोकिंद्र, सुमित, धर्मेंद्र और सोनू ने बसेड़ा-भौकरहेड़ी मार्ग पर संजीव को गोली मार दी थी। विनोद ने बचने के लिए खुद ही गोली मारी थी। संजीव की पत्नी बबीता की तहरीर पर पुलिस ने घायल विनोद समेत पांचों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी सुमित को पकड़कर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस को बताया जान का खतरा
छपार। हत्या से कुछ दिन पूर्व संजीव ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें रिश्तेदारों से जान का खतरा बताया था। संजीव के परिजनों का कहना था कि अगर पुलिस कार्रवाई करती तो शायद हत्या नहीं होती।