फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खादर क्षेत्र में सुलग रही कच्ची शराब की भट्ठियां, नशीले पदार्थ, केमिकल्स मिलाकर बना रहे जहर

Tue, 11 Sep 2018 12:26 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
खादर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाता युवक। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मोरना (मुजफ्फरनगर)। प्रदेश सरकार की सख्ती के बावजूद भी गंगा खादर क्षेत्र में कच्ची शराब का कारोबार नहीं रुक पा रहा है। पुरकाजी, शुक्रताल और रामराज तक फैले इलाके में शराब माफिया का राज है। यूरिया, नशीले पदार्थ मिला कर कच्ची शराब तैयार की जाती है, जिसकी आपूर्ति बाइकों से ग्रामीणों तक हो रही है। दूर के गांवों तक शराब पहुंचाने के लिए छोटे वाहनों का प्रयोग होता है।  
विज्ञापन


गंगा खादर क्षेत्र में कच्ची शराब का धंधा लघु उद्योग बन चुका है। भारी मुनाफा कमाने के लिए माफिया इलाके में जानलेवा शराब बेच रहे हैं। पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति है। शामली में हाल ही मेें कच्ची शराब पीने से छह लोगों की मौत हो गई थी। बावजूद इसके पुरकाजी से रामराज और गंगा बैराज तक शराब की भट्ठियां खादर के जंगल में सुलग रही है।

रात के अंधेरे में केन, ट्यूब, ड्रम आदि लेकर निजी वाहनों से शराब तस्कर पहुंचते हैं और बोतलें तैयार की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में आपूर्ति बाइकों से हो रही है। शराब में केमिकल्स आदि मिला दिए जाते है। अधिक नशा देने की वजह से इस शराब की डिमांड रहती है। क्षेत्रीय किसानों के मुताबिक रात के समय शराब तस्कर सक्रिय हो जाते हैं।
विज्ञापन


क्षेत्र के जिन गांव में अवैध शराब का धंधा रोजी-रोटी का जरिया बन चुका है, उनमें अमलावाला, चमरावाला, जिंदावाला, डुंढी घाट, खुशीपुरा, मज्जलिसपुर तोफीर, सिताबपुरी, महाराजनगर, लुकादडी, शिवपुरी, निजामपुर, हैदरपुर, रहडवा, धारीवाला, दरियाबाद, भुवापुर, कल्याणपुर, महमूदपुर डूंगर, जमालपुर बेहडा, मीरावाला, योगेंद्रनगर, बिहारगढ़ आदि शामिल है। मिलीभगत के बिना लाखों का कच्ची शराब का धंधा नहीं फैल सकता। छापे की कार्रवाई से पहले ही खादर में सूचना पहुंच जाती है।  

दलदल के रास्तों से भट्ठियों तक पहुंचते हैं तस्कर
मोरना। शराब तस्करों ने जहां भट्ठियां लगाई है, वहां पहुंचने के रास्ते कांटेदार और दलदल से भरे हैं। दो से तीन किलोमीटर पैदल चलने के बाद कच्ची शराब तैयार की जाती है। चार से पांच मीटर के चकोर गड्ढे में गुड़, लाहन आदि डाल कर तीन दिन तक सड़ा कर यह जहर बनता है।  जितना ज्यादा बदबू व कीडे़ होगा उतना ज्यादा नशा मिलता है।

कच्ची शराब पीने से शरीर रोगों की चपेट में आ जाता है। कंपन, स्किन और पेट की बीमारियों बढ़ जाती है। बतातें है कि शराब तस्कर अधिक नशे के लिए कच्ची शराब में मृत सांप, छिपकली के अलावा केमिकल्स मिला रहे है।
 गंगा खादर क्षेत्र में कच्ची शराब की भट्ठियां चलने की जानकारी मिली है। पुरकाजी और भोपा थाना प्रभारी निरीक्षकों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। आबकारी विभाग की टीम भी छापे में शामिल की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - आरबी चौरसिया, एसपी क्राइम मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें