मंसूरपुर। पुरबालियान में बच्चों के बीच खेलने के दौरान हुए मामूली विवाद पर बखेड़ा हो गया। समुदाय विशेष के लोगों ने दूसरे पक्ष के लोगों के घरों पर हमला कर दिया। मौके पर मौजूद मंसूरपुर थाने के दरोगा को भी नहीं बख्शा गया। सूचना पर एसपी सिटी खतौली व मंसूरपुर थाना पुलिस व पीएसी समेत गांव में पहुंचे और लाठीचार्ज कर हमलावरों को खदेड़ा। गांव में तनाव व्याप्त है, जिसके चलते भारी फोर्स व पीएसी के साथ ही मंसूरपुर एसएचओ खुद वहां डेरा डाले हुए हैं।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी सुमित पाल और लीहलू पुत्र मांगा के बच्चों के बीच ईद से एक दिन पूर्व खेलने के दौरान विवाद हो गया था। इसमें समुदाय विशेष के लोगों ने सुमित के घर पर हमला कर न केवल परिजनों से मारपीट की थी, बल्कि उसकी बहन से भी छेड़छाड़ भी की थी। पुलिस ने सुमित की तहरीर पर 12 नामजद व 15-20 अज्ञात के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
शुक्रवार शाम करीब पांच बजे मंसूरपुर थाने के एसआई ओमप्रकाश वादी इस मामले में सुमित के बयान दर्ज करने उसके घर में मौजूद थे। इसी दौरान कार में समुदाय विशेष के छह-सात युवक वहां पहुंचे और अकारण गाली-गलौच करने लगे। लोगों ने उन्हें रोका तो उन्होंने साथियों को फोन कर दिया। चंद मिनटों बाद ही दर्जनों हमलावर लाठी-डंडे, धारदार हथियार व अवैध असलाह लेकर सुमित के घर पहुंच गए और परिजनों पर हमला कर दिया।
मौके पर मौजूद एसआई ओमप्रकाश ने उन्हें रोकने का । प्रयास किया तो उनके साथ भी हाथापाई की गई। पूर्व प्रधान संतोष पाल के घर पर भी हमला किया गया। महिलाओं, बच्चों व युवतियों को भी नहीं बख्शते हुए उनके साथ भी मारपीट व बदसलूकी की गई। एसआई ओमप्रकाश ने वायरलेस पर मेसेज फ्लैश कर आला अफसरों को घटना की जानकारी दी।
इस पर एसपी सिटी ओमबीर सिंह, खतौली एसडीएम अतुल कुमार, तहसीलदार अमित कुमार खतौली व मंसूरपुर थाना पुलिस के साथ ही पीएसी को लेकर गांव में पहुंचे और लाठीचार्ज कर हमलावरों को दौड़ाया। इसके बाद एसपी सिटी ने एसआई ओमप्रकाश से मामले की जानकारी लेते हुए मंसूरपुर इंस्पेक्टर केपीएस चाहल को गांव में ही कैंप करने और पूर्व में सुमित की तहरीर पर दर्ज रिपोर्ट में नामजद सभी 12 हमलावरों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए। उन्होंने शुक्रवार शाम की घटना में भी सुमित पक्ष की तरफ से हमलावरों के खिलाफ एक और रिपोर्ट दर्ज करने के भी आदेश दिए। वहीं, पूर्व प्रधान संतोष पाल द्वारा भी हमलावरों के खिलाफ तहरीर देने की तैयारी की जा रही थी। तनाव के चलते पीएसी व थाने की फोर्स देर रात तक गांव में ही मौजूद थे। पुलिस ने हमलावरों की तलाश में दबिश दी, लेकिन अधिकांश आरोपी घरों पर ताले लगा परिजनों समेत फरार हो चुके थे।
कार्रवाई के बजाय समझौते का इंतजार करती रही पुलिस
मुजफ्फरनगर। पुरबालियान में शुक्रवार को हुए दो पक्षों में संघर्ष के मामले में मंसूरपुर थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। ईद से एक दिन पूर्व बच्चों के बीच हुए मामूूली विवाद के बाद एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष हमले में रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई के बजाय उनके बीच समझौता होने के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
ग्रामीणों के अनुसार, यदि पुलिस पूर्व में दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपियों की धरपकड़ करती तो शुक्रवार का बवाल नहीं होता। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदनशील मामला होने के बावजूद थाना पुलिस तीन दिन तक हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय समझौता होने का इंतजार करती रही। पुलिस की इसी हीलाहवाली का फायदा उठाते हुए एक पक्ष ने समझौते का दबाव बनाने के लिए शुक्रवार को पहले तो नामजद यामीन के भाई शमशेर के यहां काम करने वाले नौकर को पीटकर उसका आरोप सुमित पर लगाने का प्रयास किया। इसीलिए छह-सात युवक उक्त नौकर को लेकर आल्टो कार से सुमित के घर पहुंचे थे। गनीमत रही कि सुमित के घर पहले से एसआई ओमप्रकाश मौजूद थे, जिन्होंने हमलावरों की दबंगई को देख आला अफसरों को मामले से अवगत करा दिया। इसके चलते न केवल समुदाय विशेष की साजिश बेनकाब हो गई, बल्कि मंसूरपुर थाना पुलिस की लापरवाही भी सबके समक्ष उजागर हो गई।