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खनन के खेल में खाकी-खादी का गठजोड़

Sat, 21 Nov 2015 12:21 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर में खनन माफिया के लिए गंगनहर सोना उगल रही है। नियम और कानून को ताक पर रखकर प्रशासन की नाक के नीचे सफेदपोश हर दिन 20 से 30 लाख का अवैध खनन करा रहे हैं। डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से दिन-रात रेत की ढुलाई हो रही है। खुफिया विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में चेताया है कि अवैध खनन बंद नहीं कराया गया तो जिले में सांप्रदायिक माहौल खराब हो सकता है।
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सिंचाई विभाग के निर्देश पर 23-24 अक्तूबर की रात गंगनहर में जल प्रवाह बंद कर दिया गया था। वजह गंगनहर की सफाई और मरम्मत बताया गया। गंगनहर बंद होते ही उत्तराखंड के मंगलौर से लेकर खतौली तक खनन माफिया ने अवैध तरीके से रेत की ढुलाई शुरू कर दी। पूरे नेटवर्क को सत्ता से जुड़े सफेदपोश का संरक्षण बताया जा रहा है। गैरकानूनी धंधे में संलिप्त लोग दिन-रात अवैध खनन में जुटे हैं।

डंपर, टाटा 407 और ट्रैक्टर-ट्रालियों से रेत भरकर माफिया हर दिन 20 से 30 लाख तक के वारे-न्यारे कर रहे हैं। रेत को अलग-अलग जगहों पर एकत्र कर लिया गया है। हर दिन की बिक्री के अलावा स्टॉक किए गए रेत को सर्दी में बड़ी कीमतों पर बेचा जाता है। शहर में रुड़की रोड, शामली रोड, जानसठ रोड, भोपा रोड इलाके में सुबह से शाम तक रेत की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।
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अफसरों की नाक के नीचे खनन माफिया की दबंगई के आगे सब कुछ बौना है। शासन या प्रशासन से खनन की कोई लिखित परमीशन नहीं ली गई है। कोई राजस्व भी सरकार को रेत के खनन का नहीं मिला है। बावजूद इसके गोरखधंधे में शामिल माफिया बाकायदा खनन के लिए पर्ची जारी कर रहे हैं।

बोगी पर 500, ट्राली पर 1000 और डंपर से 2000 की वसूली हो रही है। मोरना के जौली और खतौली के रतनपुरी क्षेत्र में गंगनहर से अवैध खनन को लेकर किसानों और माफिया के बीच संघर्ष हो चुका है। पुलिस ने दिखावे के लिए दोनों पक्षों को मौके से खदेड़ दिया था, लेकिन गंगनहर से रेत निकालने का खेल निरंतर जारी है। खतौली में भाकियू ने भी खनन माफिया के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

खुफिया विभाग ने शुक्रवार को शासन को भेजी रिपोर्ट में मौजूदा हालात को कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया है। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध खनन के धंधे में संप्रदाय विशेष के लोग लिप्त हैं, जिससे ग्रामीणों से उनका टकराव बार-बार हो रहा है। अवैध खनन को बंद नहीं कराया गया तो जिले में सांप्रदायिक माहौल खराब हो सकता है। जहां ज्यादा खनन हो रहा है, वह वही इलाका है जहां सात सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ पंचायत से लौटती ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर हमला हुआ था।

एक्सईएन ने कहा, कोई अनुमति नहीं
मुजफ्फरनगर। सिंचाई विभाग गंगनहर के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार राणा भी स्वीकारते हैं कि गंगनहर में रेत खनन के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। अवैध खनन की शिकायत पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने खुद भोपा में रेत से भरे वाहन पकड़े थे, जिन्हें पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया था। एसडीओ यशजीत सिंह के नेतृत्व में विभाग ने पुरकाजी गंगनहर में भी छापा मारकर खनन पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।

पानी जल्द छोड़े जाने के लिए पत्र
मुजफ्फरनगर। गंगनहर 17 दिसंबर तक बंद रहने के आदेश हैं। अवैध रेत खनन ऐसे ही जारी रहा तो माफिया करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे कर चुके होंगे। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अशोक कुमार राणा ने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए शासन को जल्द गंगनहर खोलने के लिए पत्र भेजा जा रहा है।

आरोपियों पर कार्रवाई होगी: डीएम
मुजफ्फरनगर। डीएम निखिलचंद्र शुक्ला का कहना है कि शासन- प्रशासन की तरफ से गंगनहर में रेत खनन का कोई ठेका नहीं है। रेत खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। प्रतिदिन कोई न कोई कार्रवाई हो रही है।
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