सात साल पहले पत्नि का कत्ल कर और दो मासूमों को गायब करने के आरोपी पति को जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। गायब बच्चों को पुलिस सुराग तलाशने में विफल रही, जबकि हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया था। हत्यारोपी की जमानत नहीं होने के कारण वह जेल में बंद है।
थाना दोघट के गांव पुसार निवासी प्रेेमचंद पुत्र उमराव ने अपनी बेटी सुमन का विवाह सात साल पहले थाना छपार क्षेत्र के गांव बसेड़ा निवासी श्रीपाल पुत्र कालू के साथ किया था। प्रेमचंद की दूसरी बेटी कुसुम का भी बसेड़ा में ही सोनू के साथ विवाह हुआ।
30 अगस्त 2011 को कुसुम ने पिता प्रेमचंद को फोन पर बताया कि श्रीपाल ने सुमन और उसके दो बच्चों को गायब कर दिया है। घटना का 03 सितंबर 2011 को थाना छपार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के चार दिन बाद सुमन की लाश गंगनहर से बरामद की थी। शव के हाथ-पैर बंधे हुए थे और दोनों बच्चे गायब मिले, जो आज तक बरामद नहीं हो सके हैं।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार मिश्रा की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश कुमार शर्मा ने 10 गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील और सुबूतों के साथ गवाहों के बयानों पर गौर करते हुए अभियुक्त श्रीपाल को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये, धारा 201 के तहत 7 वर्ष का कारावास व 7 हजार रुपये, धारा 498 के तहत 3 वर्ष की सजा व 3 हजार रुपये, दहेज अधिनियम की धारा 3 के तहत 5 वर्ष का कारावास व 15 हजार रुपये का जुर्माना व धारा दहेज अधिनियम की धारा 4 के तहत 2 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है।