शामली के बामनौली में करीब साढ़े सात वर्ष पहले हुए रामकिशोर हत्याकांड में सोमवार को अदालत का फैसला आया। अदालत ने चार हत्यारों को हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने हत्यारों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। उधार मांगने पर यह हत्या की गई थी। हत्यारों ने रामकिशोर के शव के कई टुकड़े कर जमीन में गाड़ दिए थे।
शामली जिले के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के गांव बामनौली में छह मार्च 2010 को रामकिशोर की हत्या कर दी गई थी। बामनौली के कालूराम शर्मा ने आदर्श मंडी थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि छह मार्च की दोपहर उसका पुत्र रामकिशोर घर पर बैठा था, तभी उसके गांव के ही अजय उर्फ काला, अश्वनी उर्फ बाटा पुत्रगण विरेंद्र सिंह शर्मा, मोनू पुत्र पवन कुमार शर्मा और आत्माराम पुत्र महेंद्र शर्मा आए।
इन लोगों ने उधार के रुपये वापस करने के लिए उसके पुत्र रामकिशोर को बुलाकर ले गए, मगर उसका बेेटा वापस नहीं आया। आत्माराम से पूछा तो उसने बताया कि वह रुपये लेकर चला गया था। वह मोनू से पूछने के लिए उसके खेत पर गया, तो मोनू खेत पर नहीं मिला। जब वह खेत से वापस आ रहा था, तो उसे रास्ते में रामकिशोर की एक चप्पल और पैंट का कपड़ा पड़ा मिला। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पूछताछ के लिए अजय को हिरासत में लिया। अजय की निशानदेही पर रामकिशोर की सड़ी-गली लाश महेंद्र के खेत से बरामद हुई। लाश के कई टुकड़े किए गए थे। धड़ और हाथ-पैर सब अलग-अलग थे।
पुलिस ने इस हत्याकांड में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजकर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे मनोज कुमार मिश्रा की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में हुई। एडीजीसी नरेश कुमार शर्मा ने कोर्ट में नौ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए अभियुक्त अजय उर्फ काला, अश्वनी उर्फ बाटा, मोनू और आत्माराम को हत्या कर शव छुपाने का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 201 के तहत तीन वर्ष का कारावास एवं दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद चारों को जेल भेज दिया गया।