मुजफ्फरनगर। आसाराम के खिलाफ तीन गवाहों की हत्या करने वाले शूटर कार्तिक के पीछे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच लंबे समय से लगी हुई थी। कार्तिक ने बेहद शातिराना तरीके से छत्तीसगढ़ में छिपने की प्लानिंग की थी। मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला कार्तिक पिछले दो साल से वांटेड था।
अहमदाबाद क्राइम के मुताबिक दो महीने पहले जनवरी की शुरुआत में कार्तिक ने अपनी पत्नी रेशु सिंह को रायपुर भेजा। उसने रायपुर के पास पहंदा गांव में किराए का मकान लिया। सात दिन पहले यानी पिछले रविवार को छिपते-छिपाते कार्तिक भी अपनी पत्नी के साथ रहने लगा। उसे गांव में कोई नहीं पहचानता था। यहां छिपे रहने के दौरान वह घर से बाहर नहीं निकलता था। अहमदाबाद पुलिस के जासूस पहले से उसकी पत्नी की निगरानी कर रहे थे। उन्हें कार्तिक के आने की भनक लग गई। उसके बाद रायपुर पुलिस के साथ अहमदाबाद की टीम ने ऑपरेशन चलाकर शूटर को पकड़ा।
पुलिस अफसरों ने बताया कि कार्तिक लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। वह दो से तीन महीने से ज्यादा कहीं नहीं रुकता था। रायपुर आने के पहले कार्तिक गाजियाबाद में ठहरा। इससे पहले वह कोलकाता में छिपा हुआ था। कुछ साल पहले ही कार्तिक और रेशु की शादी हुई थी।
कार्तिक से दस तमंचे और 94 गोलियां मिली
कार्तिक के खिलाफ मर्डर के तीन और जानलेवा हमले के चार मामले दर्ज हैं। वह वर्ष 2000 में दिल्ली में आसाराम के सत्संग में शामिल हुआ था, जिसके बाद 2001 में उसने साधू बनकर आसाराम का मोटेरा आश्रम ज्वाइन कर लिया। पुलिस को उसके पास से 10 तमंचे, तीन 12 बोर के हथियार, एक 9 एमएम देसी कट्टा, तीन .32 देसी कट्टे, 94 गोलियां बरामद की गई ।