एडीजे-9 की कोर्ट ने नौ साल पहले शामली के कस्बा थानाभवन में हुए मांगेराम हत्याकांड में तीन भाइयों समेत पांच लोगों को आजीवन कारावास और 55-55 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाई जाने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
शामली जिले के कसबा थानाभवन में 11 जून 2008 को मंदिर की कमेटी के विवाद में पुजारी का अपमान करने पर दो पक्षों के बीच जातीय संघर्ष हुआ था। मांगेराम सैनी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी तथा कई लोग घायल हुए थे। मृतक मांगेराम के बेटे संजय निवासी मोहल्ला राज्जो की मोरी ने थाना थानाभवन पर उक्त मुकदमा दर्ज कराया था।
बताया था कि कस्बे में स्थित मंदिर के पुजारी बलराज के साथ मनोज पुत्र सकटूराम ने मारपीट की. जिसको लेकर मनोज से बात करने के लिए उसका पिता मांगेराम के अलावा ब्रजपाल पुत्र साधूराम, सूरजभान पुत्र हरद्वारी आरोपी मनोज के घर जा रहे थे, तभी रास्ते में दीपचन्द , घोनी उर्फ राधेश्याम , मनोज पुत्रगण सकटूराम, उमेश पुत्र दीपचन्द व नितिन उर्फ टीनू पुत्र हेमचंद ने एकराय होकर हमला बोल दिया।
गोली मार कर मांगेराम की हत्या कर दी तथा बाकी लोगों को घायल कर दिया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीके पांडे की कोर्ट संख्या 9 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंजुम खान और वादी के अधिवक्ता कुँवरपाल सैनी ने कोर्ट में 16 गवाह पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त दीपचंद , घोनी उर्फ राधेश्याम , मनोज, उमेश और नितिन उर्फ टीनू को हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और विभिन्न धाराओ में 55-55 हजार रुपया जुुर्माना की सजा सुनाई है। सभी लोग जमानत पर बाहर थे। सजा सुनाए जाने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
पूर्व प्रमुख ने वारंट रीकॉल कराया
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 में हुए दंगे के एक मुकदमे में कुतुबपुर निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र सिंह ने कोर्ट में पेश होकर वारंट रीकॉल कराए हैं। कोर्ट ने उन्हें सुनवाई के दौरान तारीखों पर कोर्ट में पेश होते रहने के आदेश दिए हैं। जानसठ थाना क्षेत्र के एक गांव में दंगे के दौरान आगजनी और पथराव के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह आरोपी है। कोर्ट में पेश नहीं होने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए थे।