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जेल से मुर्गी फार्म स्वामी से मांगी पांच लाख की रंगदारी  

Tue, 06 Sep 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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crime demo - फोटो : crime logo
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खुब्बापुर निवासी मुर्गी फार्म के मालिक से जेल में बंद शातिर ने पांच लाख रुपयों की रंगदारी मांगी है। मांग पूरी नहीं किए जाने पर कारोबारी को जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी से पीड़िता का परिवार दहशत में है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जेल में बंद शातिर सोनू मंदवाड़ी सहित पांच आरोपियों के खिलाफ रंगदारी मांगने और हत्या की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है। 
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खुब्बापुर निवासी इस्तकार पुत्र महबूब का मुर्गी फार्म है। इस्तकार के मोबाइल पर 27 अगस्त को एक काल आई, जिसमें उससे जेल में बंद शातिर सोनू मंदवाड़ी ने पांच लाख रुपयों की रंगदारी मांगी। मांग पूरी नहीं दिए जाने पर आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद से लगातार से सोनू मंदवाड़ी के फोन इस्तकार पर आ रहे हैं। रंगदारी और हत्या की धमकी से पीड़ित का परिवार दहशत में आ गया।

पीड़ित के अनुसार एक दिन रात में कुछ संदिग्ध उसे तलाश करते हुए मुर्गी फार्म पर आए थे, उस दिन उसने भागकर अपनी जान बचाई थी। परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस को घटना से अवगत कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। मामले में पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर जेल में बंद सोनू मंदवाड़ी और खुब्बापुर निवासी करीम, शहजाद, वाजिद  और फैय्याज के खिलाफ रंगदारी मांगने और हत्या करने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। 
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जेल से मिली थी हत्या की सुपारी
मुर्गी फार्म स्वामी इस्तकार से रंगदारी मांगे जाने के मामले में दरोगा लेखराज ने बताया कि आठ अगस्त को भोपा पुलिस ने कुछ बदमाशों को गिरफ्तार किया था। बदमाशों ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि जेल में बंद बदमाशों ने उन्हें खुब्बापुर के मुर्गी फार्म मालिक की हत्या की सुपारी दी थी। बताया कि खुब्बापुर में चार वर्ष पूर्व राहुल पंडित की हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड में करीम, शहजाद, वाजिद व फैय्याज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वाहिद और फैय्याज जमानत पर छूट गए थे, जबकि करीम और शहजाद जेल में ही हैं। 

रंगदारी की कॉल ने फिर खोली जैमर की पोल
जेल से रंगदारी मांगे जाने की बात वैसे तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन सरकार द्वारा सवा तीन करोड़ रुपये खर्च करने के बाद लगाए गए जैमर के चालू रहने पर भी रंगदारी मांगे जाने की बात जेल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। 

सरकार ने जेलों से संचालित गिरोह के नेटवर्क तोड़ने और रंगदारी की घटनाओं पर विराम लगाने के लिए प्रदेश की 22 जेलों में जैमर लगवाने का निर्णय लिया। इसमें सबसे पहले मुजफ्फरनगर की जेल में जैमर लगवाने का निर्णय लिया गया। अप्रैल माह में सवा तीन करोड़ की लागत से हैदराबाद से आए तकनीशियनों ने कारागार के भीतर छह जैमर लगाए। जेल अधिकारियों और प्रशासन को लगा कि अब अपराध पर कुछ लगाम लगेंगी, लेकिन हुआ इससे उल्टा।

पहले तो जेल में बंद शातिर महिला द्वारा एक राजपत्रित अधिकारी की हत्या की सुपारी की बात करने की बात सामने आई, और फिर अब खुब्बापुर निवासी मुर्गी फार्म स्वामी से पांच लाख रुपयड्ढी रंगदारी मांगे जाने की बात सामने आई है। इससे पूर्व भी मंसूरपुर के सराफ को जेल से आए फोन पर रंगदारी नहीं देने पर गोली मारे जाने और खतौली के पेंट कारोबारी से भी जेल से रंगदारी मांगे जाने के बड़े मामले सामने आते रहे हैं। सवाल उठता है कि अभी भी जेल में फोन चल रहे हैं तो ऐसे में जेल में लगे जैमरों का क्या फायदा। 
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