जिला कारागार से फोन पर रंगदारी मांगने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जेल में बंद कई शातिर अपराधी भीतर से ही फोन पर व्यापारियों से रंगदारी मांगने में जुटे हैं। रंगदारी के एक मामले में पीड़ित व्यापारी ने डीएम को फोन पर रंगदारी मांगने की सूचना दी।
डीएम के आदेश पर जेलर ने बैरक में छापा मारा तो आरोपी फोन पर बात करते दबोच लिया। उसके पास से मोबाइल और सिम मिले हैं। आरोपी पहले से ही रंगदारी के मामले में कारागार में बंद है। जेलर ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए नई मंडी कोतवाली में तहरीर दी है।
प्रशासन के प्रयास के बावजूद जेल से रंगदारी मांगने और फोनों का संचालन रुकने का नाम नहीं ले रहा।सोमवार को कारागार के भीतर से एक बदमाश ने शहर के एक व्यापारी से लाखों की रंगदारी मांगी। पीड़ित व्यापारी ने तुरंत मामले की सूचना डीएम को दी। डीएम ने जेलर को मामले की जानकारी देकर तभी बैरकों की तलाशी करवाकर आरोपी का पता लगाने के निर्देश दिए।
जेलर सतीशचंद त्रिपाठी ने सभी बैरकों में तलाशी अभियान चलाया तो देखा कि बैरक नंबर पांच के बंदी मखियाली निवासी सुमित पुत्र हरबीर ने फोन चला रखा था। जेलर ने उससे सैमसंग का एक फोन और एक सिम बरामद किया। फोन मिलने पर जेलर ने बंदी को जमकर हड़काया। आरोपी सुमित फैक्ट्री के मैनेजर से रंगदारी मांगने के मामले में 21 मई से कारागार में बंद है।
जेलर ने आरोपी सुमित के खिलाफ नईमंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। बताते चलें कि शनिवार रात भी बैरकों की तलाशी के दौरान जेलर ने बैरक नंबर 18ए से बेहड़ा अस्सा निवासी बंदी से फोन बरामद किया था। जेल प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद बैरकों में चलाए जा रहे फोन बंद होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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जेलर सतीश चंद त्रिपाठी ने कहा कि एक-दो दिन के भीतर जैमर चालू होने की संभावना है। जैमर चालू होते ही जेल के भीतर चलने वाले फोन अपने आप बंद हो जाएंगे। कई बार तलाशी होने के बाद भी बंदी फोन चलाते पकड़े जाते हैं। आरोपियों के खिलाफ मुकदमे लिखवाए गए हैं।
जेल में पानी की समस्या, रोजेदार बंदियों में रोष
जेल के भीतर करीब 1100 बंदियों ने रोजे रख रखे हैं। रविवार शाम इफ्तार के समय जेल की ट्यूबवेल की मोटर का स्टार्टर फुंकने से रोजेदारों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई। पता चलने पर बंदियों ने हंगामा कर दिया था। जेलर ने बंदियों को बड़ी मुश्किल से समझा-बुझाकर शांत किया।
करीब ढाई हजार बंदियों के लिए पानी की व्यवस्था का जिम्मा चार छोटे टुल्लू पंपों के हवाले है। सोमवार शाम तक भी ट्यूबवेल चालू नहीं हो पाई थी। जेलर परेशान नजर आ रहे थे। उनका कहना था कि यदि समय से ट्यूबवेल चालू नहीं हुई तो बंदी शाम को इफ्तार के समय फिर से पानी के लिए हंगामा कर सकते हैं। पूरे दिन जेलर ने स्टाफ को ट्यूबवेल ठीक कराने के लिए दौड़ाए रखा।